हिमाचल प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में दस साल पहले हुए कथित विदेशी कैंची खरीद घोटाले के सबूतों की फाइल ही फाड़ दी गई है। विजिलेंस ब्यूरो ने इससे संबंधित ब्योरा तलब किया तो यह बात सामने आई है। इस संबंध में वर्ष 2008 में हुई शिकायत पर फिर से विजिलेंस जांच खोली गई है।
भाजपा के शासनकाल में एक पूर्व मंत्री भी इस कथित घोटाले की इन्कवायरी की जद्द में आ चुके थे। आरोप है कि सेब के पेड़ों की प्रूनिंग करने वाली ये विदेशी कैंचियां हिमाचल सरकार की मंजूरी की औपचारिकताओं को पूरा किए बगैर असल रेट से महंगी खरीदी गईं और सरकार को इससे आर्थिक नुकसान हुआ। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने हाल ही में कथित कैंची खरीद घोटाले की जांच फिर से खोली है।
बड़ी संख्या में ये कैंचियां पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही वर्ष 2005 में खरीदी गई थीं। ये बागवानी तकनीकी मिशन में मिले बजट से खरीदी गई थीं। राज्य बागवानी विभाग ने इस खरीद के लिए हिमाचल प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन को नोडल एजेंसी बनाया था। अब विजिलेंस ब्यूरो ने हाल ही में इसी पुरानी शिकायत पर 16 पृष्ठों की एक प्रश्नावली कॉरपोरेशन को भेजी है।