रीढ़ी बस्ती में भूस्खलन से असुरक्षित हुए घर
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150 से 200 मीटर लंबे और 40 से 50 फीट ऊंचे डंगे मनरेगा योजना के तहत लगाने का सरकार का निर्णय अव्यावहारिक है। यह मदद के नाम पर प्रभावितों के साथ धोखा है। यह बात पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि पिपली-भराड़ी ग्राम पंचायत की रीढ़ी बस्ती के एक दर्जन परिवारों के मकानों के चारों तरफ गिरे ल्हासे गिरे हैं।
भूपेंद्र ने कहा कि इस बस्ती में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। लोगों को अपना मकान सुरक्षित करने के लिए 15-15 हजार रुपये तो तिरपाल खरीदने के लिए खर्च करने पड़े हैं, लेकिन अब सरकार के नियम का हवाला देते हुए राजस्व विभाग ने इन सभी घरों को न तो असुरक्षित घोषित किया है और न ही इन्हें कोई सहायता प्रदान करने के लिए चयनित किया है।
भूपेंद्र सिंह ने बताया कि गांव में हुए नुकसान को देखने विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने दौरे कर रस्म अदायगी कर दी दै। इन सभी घरों के आसपास लगने वाले डंगों पर 10 से 15 लाख रुपये खर्च होंगे। पटवारी की गलत रिपोर्ट से भी सहायता से एक प्रभावित जयपाल वंचित हो गए हैं।
भूपेंद्र ने कहा कि सारा क्षेत्र असुरक्षित हो गया है। लाखों रुपये खर्च कर बनाए मकानों में रहने से लोग घबरा रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि रीढ़ी बस्ती में हुए नुकसान की भरपाई के लिए नियमों में तुरंत बदलाव कर इन सभी घरों की सुरक्षा की पुख्ता इंतजाम किए जाएं।