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22 नक्शे पास करने पर उठे सवाल, यदि सही थे तो पिछले साल ही क्यों नहीं दी मंजूरी

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एनजीटी के फैसले से पहले के हैं 1000 आवेदन, सचिव टीसीपी ने 24 अक्तूबर 2019 को जारी किए थे निर्देश
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शिमला। राजधानी में 22 भवन मालिकों को पुराने नियमों के तहत भवन निर्माण करने की मंजूरी देने के नगर निगम प्रशासन के फैसले पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। यह 22 लोग कौन हैं, इस पर शहर में चर्चा गरमा गई है।
सरकार ने यह दिशा निर्देश बीते साल 24 अक्तूबर को जारी कर दिए थे ऐसे में अब एक साल बाद 22 नक्शों को मंजूरी देने को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सचिव टीसीपी की ओर से नगर निगम को इस बारे में पत्र भेजा था। इसमें स्पष्ट किया है कि जिन लोगों के आवेदन सही हैं और सारी औपचारिकताएं पूरी हैं, उन्हें पास किया जा सकता है। ऐसे में यदि यह 22 आवेदन सारी औपचारिकताएं पूरी करते थे तो इन्हें पिछले साल ही मंजूरी क्यों नहीं दी गई। आखिर एक साल तक इन्हें क्यों लटकाया गया। इस एक साल में कई बार निगम की हाउस प्लान अप्रूवल कमेटी की बैठकें हुईं फिर क्यों इन्हें पास नहीं किया गया। सूत्रों के अनुसार एनजीटी के फैसले से पहले नक्शों के आवेदन करने वालों की संख्या एक हजार से भी ज्यादा हैं। अब अचानक 22 नक्शों को मंजूरी मिलने के बाद यह लोग अपने पार्षदों से अपने नक्शों के बारे में पूछने लगे हैं।
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सैकड़ों आवेदनों पर लापरवाही, पार्षद भी परेशान
टीसीपी की ओर से जारी दिशा निर्देश में यह भी लिखा है कि जिन लोगों ने एनजीटी के फैसले से पहले नक्शों के आवेदन जमा करवाए हैं उन्हें भी नियमानुसार एक मौका दिया जा सकता है। लेकिन नगर निगम ने इस पर भी सस्पेंस रखा है। आवेदन करने वाले लोग नगर निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। प्रशासन की लापरवाही से पार्षद भी परेशान हैं। यह शहरी विकास विभाग और टीसीपी को पत्र लिखने को मजबूर हो रहे हैं। नगर निगम में पुराने नक्शों पर स्थिति स्पष्ट न होने पर हाल ही में मज्याठ पार्षद दिवाकर देव शर्मा ने विभाग को पत्र लिखा था। इससे पहले पार्षद किरण बावा समेत दो भाजपा पार्षदों ने भी एनजीटी से फैसले से पहले आवेदनों पर सवाल किए थे, लेकिन इन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिले।
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अधिकारियों की चुप्पी से उठे सवाल
नगर निगम अधिकारी इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इनकी चुप्पी भी कई सवाल खड़े कर रही है। इस बारे में निगम के अतिरिक्त आयुक्त से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। बाकी अधिकारी भी प्रशासन के निर्देशों का हवाला देकर कोई भी बयान देने से बच रहे हैं।
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