हिमाचल समेत अन्य पहाड़ी राज्यों में वेटलैंड केे आसपास बन रही पीटलैंड में हजारों साल पुराना कार्बन संचित है, जो हिमालयी क्षेत्रों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पीटलैंड में थर्मल पावर से भी कई गुना ग्रीन हाउस गैसाें का उत्सर्जन हो सकता है। अगर इन पीटलैंड में कार्बनिक पदार्थ पानी में डूबे नहीं रहते हैं और जल स्तर नीचे जाता है तो ये ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन करेंगे। इससे हिमालय क्षेत्र में तापमान में वृद्धि होगी, जो तेजी से जलवायु परिवर्तन का कारण बनेगी। यह चिंता नौ राज्यों-केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्र सरकार, अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की शिमला में हुई उत्तर भारत स्तर की कार्यशाला में जाहिर की गई। जरूरत जताई गई कि वेटलैंड के संरक्षण की तरह ही पीटलैंड के उपचार की भी बड़ी जरूरत है। विशेषज्ञों ने कहा कि पीटलैंड को पानी के अंदर डुबाकर रखना बहुत जरूरी है। यह तभी होगा जब वेटलैंड में जलस्तर ठीक ठाक रहेगा।