इलाज करने वाले ही सबसे ज्यादा एड्स की चपेट में आ रहे हैं। इसका खुलासा एआरटी सेंटर टांडा मेडिकल कॉलेज के आंकड़ों से हुआ है। इस एआरटी सेंटर में करीब 12 एड्स मरीज सरकारी विभागों के कर्मचारी हैं, लेकिन हैरत की बात यह है कि इन 12 मरीजों में से सबसे ज्यादा स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी हैं।
इन चौंकाने वाले आंकड़ों से स्वास्थ्य महकमा खुद हैरत में है। उधर, कुछ माह पहले ‘अमर उजाला’ ने यह भी खुलासा किया था कि कुछ चिकित्सक और नर्सें भी एड्स पीड़ित मरीजों का इलाज करते-करते एचआईवी की चपेट में आ गई थीं। इनका भी टांडा में इलाज हुआ। ‘अमर उजाला’ में डॉक्टर और नर्सों के एचआईवी की चपेट में आने की खबर छपने के बाद कांगड़ा से लेकर स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय शिमला तक हड़कंप मच गया था।
अब उस मामले में भी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग शिमला भेज दी गई है। खबर छपने के बाद तमाम अस्पतालों में सुरक्षा के सख्त आदेश स्वास्थ्य विभाग ने दिए थे। इनका अब तन्मयता के साथ पालन हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की तमाम कोशिशों के बाद भी एड्स ग्रस्त मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
हिमाचल में सबसे ज्यादा एड्स से ग्रस्त मरीजों की संख्या कांगड़ा में है। यहां पर करीब 976 लोग एड्स से ग्रस्त हैं। इसके अलावा हमीरपुर में एड्स ग्रस्त मरीजों की संख्या दूसरे नंबर पर है। यहां 790 लोग एड्स से ग्रस्त हैं। सिरमौर में भी एड्स से ग्रस्त मरीजों की संख्या कम ही है।