डिमांड ऑफ सर्वे के नाम पर आवेदन के साथ पांच हजार रुपये लेकर आशियाने का सपना दिखाने वाली प्रदेश सरकार ने हजारों लोगों की उम्मीदें तोड़ दी हैं। आवेदन लेने के करीब 7 साल बाद हिमुडा ने आवेदकों को फ्लैट और प्लॉट देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
जमीन नहीं मिलने और निर्माण लागत बढ़ने का हवाला देते हुए हिमुडा ने सूबे के 20 क्षेत्रों में प्लॉट और फ्लैट बनाने से इंकार कर दिया है। इन क्षेत्रों में फ्लैट और प्लॉट के लिए आवदेन करने वाले करीब ढाई हजार लोगों को पैसे लौटाए जा रहे हैं।
1090 आवेदकों को यह राशि 6 फीसदी ब्याज के साथ लौटा दी गई है। गौरतलब है कि वर्ष 2009 में डिमांड आफ सर्वे के तहत फ्लैट और प्लॉट के लिए हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) के पास करीब 65 हजार लोगों ने आवेदन किए थे। इनमें 3 हजार आवेदक लंबे इंतजार के बाद सिक्योरिटी राशि वापस ले चुके हैं।
इन 20 जगहों पर बनाए जाने थे फ्लैट
हिमुडा की प्रदेश के कई क्षेत्रों में लोगों को फ्लैट और प्लॉट बनाकर देने की योजना थी। अब परागपुर, रामपुर, भोरंज, चिंतपूर्णी, जाहू, ज्वालामुखी, करसोग, कुमारसैन, सुन्नी, जुब्बल, मणिकर्ण, नयनादेवी, पंडोह, राजगढ़, सरकाघाट जैसे 20 क्षेत्रों में जमीन न मिलने का हवाला देकर हिमुडा अब इन शहरों में फ्लैट बनाने से पीछे हट गया है।
हिमुडा के वाइस चेयरमैन यशवंत छाजटा ने बताया कि हिमाचल के 20 स्थानों पर अब फ्लैट और प्लॉट नहीं बनाए जाएंगे। इन क्षेत्रों के लिए आवेदन करने वाले लोगों की सिक्योरिटी राशि ब्याज के साथ लौटाई जा रही है।