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Shimla News: बागवानी विभाग ने गोपालपुर में तैयार किया ब्लूबेरी

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तीन लाख में तैयार कर लिया 200 पौधों का बगीचा, बाजार में ब्लूबेरी की भारी मांग, दाम भी अधिक
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लाभकारी बागवानी के लिए प्रोत्साहित कर रहा विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले में उद्यान विभाग पारंपरिक बागवानी के साथ अब नए फलों की बागवानी को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए विभाग पहले चरण में सरकारी बगीचों में नए फलों के बगीचे तैयार कर बागवानों को प्रोत्साहित कर रहा है।
विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गोपालपुर में करीब 3 लाख की लागत से 200 ब्लूबेरी के पौधों का बगीचा तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इसमें खास बात यह है कि ब्लूबेरी दूसरे साल में फल देना शुरू कर देता है और मार्केट में इसकी काफी मांग रहती है। उन्होंने बताया कि ब्लूबेरी की मांग देश के बड़े शहरों के साथ विदेशों में काफी रहती है। बाजार में यह औसत 100 से 3000 रुपये प्रतिकिलो तक बिकती है। यह एक लाभकारी फसल है। विभाग बागवानों को सेब, नाशपाती, प्लम और आड़ू जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम कर इस तरह की लाभकारी फसलों के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। बीते कुछ सालों से बागवानों को बेमौसमी बारिश और मौसम की बेरुखी से काफी नुकसान हो रहा है। ऐसे में बागवानी में विविधिकरण लाने के लिए इस तरह के नए और लाभकारी फलों की बागवानी के लिए बागवानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले शिलारू में सरकारी पॉलीहॉउस में करीब 1900 के करीब पौधे लगाए थे। वहां पर बगीचा तैयार हो गया है यह पौधे जल्द फल देना शुरू कर देंगे। अधिकारियों का कहना है कि ब्लूबेरी पॉलीहाउस और खुले दोनों में पैदा हो सकती है। विभाग बागवानों को 75 फीसदी की सब्सिडी भी दे रहा है। चमियाना और रोहड़ू में निजी भूमि पर भी ब्लूबेरी के बगीचे तैयार किए जा रहे हैं।
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इनसेट
ब्लूबेरी खाने में स्वादिष्ट होती है तथा सेहत के लिए काफी फायदेमंद मानी जाती है। इसमें एंटी ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा पाई जाती है। यह मधुमेह, ब्लड प्रेशर, वजन को कम करने में लाभकारी होती है। इसके अलावा इसमें विटामिन सी भी भरपूर पाया जाता है।
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कोट
विभाग गोपालपुर में ब्लूबेरी का करीब 3 लाख की लागत से 200 पौधों का बगीचा तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य समय के साथ नई और लाभकारी फसलों को बढ़ावा देना है और बागवानों को लाभकारी फसलों के लिए प्रोत्साहित करना है।
-प्रदीप हिमराल, बागवानी विशेषज्ञ, उद्यान विभाग
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