सेब सीजन के दौरान प्रदेश की 5 मंडियों में क्रेट में सेब बेचने की सरकार की घोषणा को शिमला जिले के बागवानों ने फायदेमंद करार दिया है। साथ ही इसके लिए पुख्ता तैयारियां करने की मांग उठाई है। बागवानों का कहना है कि सरकार को सब्सिडी पर क्रेट उपलब्ध करवानी चाहिए और मंडियों में भी इसके लिए जरूरी इंतजार होने चाहिए। टिक्कर शरौंथा के बागवान दीपक चौहान का कहना है कि कार्टन की जगह क्रेट में सेब बेचने पर लेबर का खर्चा आधा रह जाएगा।
जो बागवान सालाना लेबर पर दो लाख खर्च करते हैं उन्हें एक लाख ही खर्च करना पड़ेगा लेकिन सरकार को यह व्यवस्था लागू करने के लिए सभी जरूरी तैयारियां करनी चाहिए। कोटखाई हिमरी बड़ोग के बागवान सुनील शर्मा का कहना है कि क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था छोटे और मझोले बागवानों के लिए फायदेमंद है। ऐसा होने से खर्चा बचेगा और उपज के सही दाम भी मिलेंगे। कोटखाई के बागवान राजेश मेहता का कहना है कि सरकार का यह निर्णय बागवानों के हित में है लेकिन सरकार को इसके लिए पुख्ता इंतजाम भी करने होंगे।
बागवानों को अनुदान पर क्रेट उपलब्ध करवाई जानी चाहिए। सीजन के दौरान लेबर की समस्या से भी छुटकारा मिलेगा। कोटखाई के बागा निवासी बागबान नीरज ठाकुर का कहना है कि मौजूदा समय में बड़े बागवानों को मंडियों में अच्छे दाम मिलते हैं जबकि छोटे भगवानों को उतना फायदा नहीं होता। क्रेट में सेब बिकने पर वजन के हिसाब से पैसा मिलेगा। छैला बनाहर के युवा बागवान विशाल वेक्टा का कहना है कि कुल्लू में पिछले कई सालों से क्रेट में ही सेब बिकता है।
क्रेट में सेब की पैकिंग आसान है। क्रेट में प्लास्टिक की ट्रे लगाकर ईरान से भी भारत में सेब आयात होता है। बखोल कोटखाई के बागवान मनोज चौहान का कहना है कि क्रेट में सेब बिकने पर लेबर का खर्चा बचेगा। मंडी में ताजा माल पहुंचने से बागवानों को बढ़िया रेट मिलेंगे। सरकार को क्रेट में सेब बेचने को लेकर सभी जरूरी इंतजाम तुरंत करने चाहिए।
आढ़ती एसोसिएशन के मुख्य सलाहकार अनुपाल चौहान का कहना है कि क्रेट में सेब बेचना बागवान, आढ़ती और खरीददार तीनों के हित में है। बागवानों का 200 से 300 रुपये प्रति पेटी खर्चा बचेगा। मंडियों में माल की खरीद फरोख्त में पारदर्शिता आएगी। खरीदार को स्टोर की जरूरत नही पड़ेगी। सरकार को जल्द से जल्द क्रेट में सेब बेचने की व्यवस्था लागू करनी चाहिए।