ऐसे में इस तरह का आयोजन होने से विद्यार्थियों में शतरंज के प्रति रुचि बढ़ेगी और देश का नाम भी रोशन होगा। उन्होंने बताया कि गुजरात सरकार ने साल 2009 और तमिलनाडु ने साल 2012 में शतरंज को अनिवार्य विषय के तौर पर स्कूलों में शुरू किया है। उन्होंने कहा कि शतरंज खेलने से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। उन्होंने बताया कि सरकार से मंजूरी मांगी गई है। मंजूरी मिलते ही अप्रैल-मई में आयोजन करवाया जाएगा।
100 छात्रों के साथ खेल चुके हैं आजाद
शिमला। हितेश आजाद अगस्त महीने में राजधानी शिमला के लालपानी स्कूल में सौ विद्यार्थियों के साथ शतरंज खेल चुके हैं। आठ घंटे तक चली इस प्रतियोगिता में संयुक्त निदेशक को दो विद्यार्थियों ने मात दी थी, जबकि दो ने ड्रा खेला। संयुक्त निदेशक को इसी प्रतियोगिता से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने की प्रेरणा मिली है।