दरअसल, कशैणी गांव का राजशाही के जमाने से अलग इतिहास रहा है। नावर क्षेत्र का यह गांव इकलौता ऐसा स्थान है, जहां सौ से अधिक मकान एक-दूसरे से सटकर बने हुए थे। गांव के बीचोंबीच आराध्य देवता महासू का मंदिर था।
आसपास के इलाके में कशैणी गांव ही ऐसा है, जहां के निवासी भारतीय प्रशासनिक सेवा और हिमाचल प्रशासनिक सेवा में चुने जाने पर सेवाएं दे चुके हैं। गांव का राजनीतिक रसूख भी रहा है। अग्निकांड के बाद राख के ढेर में तब्दील हुए गांव को लोग नम आंखों से दिनभर निहारते रहे।
कशैणी गांव के अग्निकांड पीड़ित परिवारों को किसी अन्य जगह दो बिस्वा जमीन दिलाने का भरोसा दिलाया गया है। प्रभावितों से मिलने पहुंचे शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और जुब्बल कोटखाई के विधायक नरेंद्र बरागटा ने कहा कि जले हुए मकानों की जगह पर टनों मलबा पड़ा हुआ है।
अब यहां पर दोबारा घर बनाना संभव नहीं है। कुछ परिवाराें के पास बेहद कम भूमि है। ऐसे में प्रभावितों को सरकार की ओर से किसी दूसरी जगह पर दो बिस्वा जमीन दिलाई जाएगी।
उन्होंने मौके पर ही डीसी व एसडीएम से सरकार भूमि तलाश कर भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए। उन्होंने कहा, यदि मामले को मंत्रिमंडल की बैठक में लाना भी पड़ा तो सरकार उसमें सहयोग करेगी।