इस बार हिमालयी ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की आशंका है। बीते दिनों हुई बारिश, बर्फबारी से पश्चिमी हिमालय के ग्लेशियरों पर करीब एक सेंटीमीटर मोटी धूल की परत चढ़ गई है, जिसकी वजह से ग्लेशियर हल्के काले रंग में बदल गए हैं।
जीबी पंत राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने आशंका व्यक्त की है कि इससे ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार बढ़ जाएगी। अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. जेसी कुनियाल का कहना है कि जिस तरह पश्चिमी हिमालय के ग्लेशियरों पर मिट्टी की परत बिछी है, उससे ग्लेशियर तेजी से पिघलेंगे और बाढ़, भूस्खलन की आशंका बढ़ेगी।
धुएं में रेत के कण हैं जो ग्लेशियरों के लिए खतरनाक हैं। इससे हिमालयी क्षेत्रों की दुर्लभ जड़ी-बूटियों पर भी असर पड़ेगा। पश्चिमी हिमालय के बड़ा शिगरी, छोटा शिगरी, ककटी, कांगला, गंगस्टांग, कुगती समेत कई ग्लेशियरों पर धूल की परत के साथ ही हल्के काले रंग की पपड़ी सी जम गई है।
स्थानीय बुजुग दोरजे, टशी, अंगरूप, छिमेद का कहना है कि उन्होंने दशकों बाद ग्लेशियरों पर काली धूल जमी देखी। यह कतई अच्छा संकेत नहीं है।