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हिमाचल से मुंह फेर रहे बिजली उत्पादक, ये है बड़ी वजह

Fri, 20 Jul 2018 07:16 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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ऊर्जा राज्य हिमाचल से बिजली उत्पादकों के मुंह फेरने का बड़ा कारण पंचायतों की ब्लैकमेलिंग बताया जा रहा है। शुक्रवार को शिमला में बिजली उत्पादकों की बैठक में कहा गया कि लाडा फंड लेने के बाद ग्रामीण निवेशकों से पैसा वसूल रहे हैं। 

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सैकड़ों बिजली प्रोजेक्ट अधर में फंसने का कारण यही है। शनिवार को बिजली उत्पादक इस मामले को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के समक्ष उठाएंगे।

शुक्रवार को बोनोफाइड हिमाचली हाइड्रो पावर डेवलेपर्स और हिमालय पावर प्रोडूयसर एसोसिएशन की ओर से बिजली उत्पादकों को जागरूक करने के लिए बैठक करवाई गई।

अधिकांश उत्पादकों ने पंचायतों की मनमानी का मामला उठाया। बिजली उत्पादकों ने कहा कि प्रोजेक्ट की कुल लागत का एक फीसदी लाडा फंड में दिया जाता है। बावजूद पंचायतें काम रुकवाने की धमकियां देकर अधिक पैसा वसूल रही हैं। 

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उत्पादकों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की

उत्पादकों ने सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की। बोनोफाइड हिमाचली हाइड्रो पावर डेवलेपर्स के अध्यक्ष राजेश शर्मा और महासचिव हेम सिंह ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में छोटे बिजली प्रोजेक्ट लगाने की लागत बढ़ गई है जबकि कैपिटल कॉस्ट कम आंकी जा रही है।

दूसरे राज्यों के मुकाबले हिमाचल में टैरिफ रेट कम मिल रहा है। प्रदेश में करीब 650 बिजली प्रोजेक्ट विभिन्न मंजूरियां नहीं मिलने के चलते शुरू नहीं हो पा रहे हैं। इनमें पांच मेगावाट तक के 596 और 25 मेगावाट तक के 50 से अधिक प्रोजेक्ट शामिल हैं।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि सौ किलोवाट तक के प्रोजेक्टों की डीपीआर नहीं बननी चाहिए। विभिन्न एनओसी में छूट मिलनी चाहिए। फारेस्ट क्लीयरेंस डीएफओ स्तर पर मिलनी चाहिए।

ऊर्जा निदेशक मानसी सहाय ठाकुर ने कहा कि उत्पादकों की सभी मांगों को प्रदेश सरकार से अवगत करवाया जाएगा। बोर्ड निदेशक सुदेश मोक्टा ने कहा कि उत्पादकों को बेहतर माहौल देने के लिए सरकार प्रयासरत है।
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संशोधित नीति के लाभ देने को राजी नहीं नियामक आयोग 

उत्पादकों ने बताया कि सरकार ने संशोधित ऊर्जा नीति में बिजली उत्पादन बढ़ाने के लिए कई संशोधन किए हैं लेकिन बिजली नियामक आयोग छूट देने को राजी नहीं है।

आयोग ने पहले साल 2021 के बाद छूट देने की बात कही। अब इसे घटाकर मार्च 2019 कर दिया है। छूट लागू नहीं होने से उत्पादकों में रोष है। बिजली उत्पादकों ने प्रदेश में नए प्रोजेक्ट लगाने के लिए सरकार से आवेदन करने के लिए ऑनलाइन पोर्टल बनाने की मांग की है।

उत्पादकों का कहना है कि समय की बचत के लिए इस पोर्टल के माध्यम से ही सभी दस्तावेज जमा होने चाहिए। संबंधित विभाग भी यहीं पर एनओसी जारी करे।
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