किरण ने बताया कि पिता बलदेव चौहान किसान और माता प्रभा चौहान गृहिणी हैं। घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। ज्यादा बीमार रहती थीं। ऐसे में जमा दो के आगे पढ़ाई नहीं कर पाईं। जमा दो के बाद सिलाई का काम सीखा। गाने के शौक को भी जारी रखा।
अभी वह दुकान में सिलाई का काम करने के साथ गाना भी गाती हैं। किरण की बड़ी बहन प्रियंका की शादी हो गई है, जबकि रोहित छोटा भाई है। किरण कहती हैं कि यदि हम हिंदी और पंजाबी के पीछे भागते रहे तो हमारे लोक गीत विलुप्त हो जाएंगे। अपनी संस्कृति को बचाने के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए। सरकार को भी सहयोग करना चाहिए।
बेटी को गीत-संगीत में न भेजने की बात करते थे लोग
लड़की को गीत-संगीत में न डालने की लोगों की बातें सुनकर कभी-कभी माता-पिता किरण को गाना छोड़ने के लिए बोलते थे। किरण के समझाने पर वह मान जाते और माता-पिता ने किरण को आगे बढ़ने में हमेशा उसका साथ दिया। माता-पिता के अलावा सुमित नारायण, संगीत निदेशक प्रभु नेगी और सिंगर बबलू ने भी उनका सहयोग किया। बबलू ही किरण के लिए गाने लिखते हैं।
मां को गुनगुनाते सीखा गाना
किरण चौहान को रोहडू में कोई गाना सिखाने वाला नहीं था। संगीत सीखने के लिए वह शिमला जा नहीं सकती थीं। ऐसे में उनकी माता ही उनकी गुरु बन गईं। किरण चौहान की माता घर में लोक गीत गुनगुुनाती थीं। माता से ही उन्होंने गाना सीखा। मां पारंपरिक गीतों को गाने और उनके बोल बताती थीं।