कश्मीरी लाल के पिता मंत्री राम और माता गिन्नो देवी के पांच बेटे और एक बेटी हैं। गरीबी के कारण कश्मीरी लाल पढ़ाई नहीं कर पाए, लेकिन उन्होंने भरमौर के होली में रहने वाले अपने भाई के साले पूर्ण चंद पुन्नू ने खंजरी रुमाना बजाना और गाना सीखा है।
साल 1994 में उन्होंने रेडियो का ऑडिशन दिया था। इसमें उन्हें बी ग्रेड मिला था। इसके अलावा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के भी कैजुअल आर्टिस्ट हैं। सरकार की योजनाओं को गाने में पिरोकर उनका प्रचार करने में माहिर रहे हैं।
लोक कलाकार कश्मीरी लाल कहते हैं कि उन्होंने पूरी उम्र लोक संस्कृति के संरक्षण में लगा दिया है। वह अनपढ़ हैं, लेकिन उनके बच्चे पढ़े-लिखे हैं। ऐसे में उनके एक बेटे को सरकारी नौकरी मिल जाए तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो पाएगी। कश्मीरी लाल के घर में पत्नी वीना देवी, लड़की पूजा देवी, बेटे संजय और पवन हैं। कश्मीरी लाल का परिवार उनकी गायकी से ही चलता है।
नशे से दूर रहें युवा
कश्मीरी लाल कहते हैं कि पूर्व में शादी-विवाह में दुल्हे दूल्हन की ताई, चाची, मामी, मौसी और बुआ सहित अन्य महिलाएं रस्मों के स्वयं गाने गाती थीं, लेकिन अब युवाओं में डीजे का क्रेज बढ़ गया है। इससे संस्कृति पिछड़ती जा रही है। उन्होंने युवाओं से भी नशे से दूर रहने का आह्वान किया है।