जब इसी तरह से कई बार शिकायतकर्ताओं को आरोपी लाखों रुपये लेने के बाद भी भर्ती होने के नाम पर टालमटोल और झूठे आश्वासन देता रहा तो उन्हें धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पैसे वापस मांगना शुरू किए। पंकज ने 80,000 रुपये लौटा दिए, लेकिन शेष राशि देने के लिए आनाकानी करता रहा। वर्ष 2022 से वर्ष 2024 के बीच दो वर्षों तक दो परिवारों से तीन बच्चों को भर्ती करवाने के लिए साढ़े ग्यारह लाख रुपये की रकम ली गई। लेकिन उन ही नौकरी मिली और न ही पैसे वापस दिए गए। मामले की जांच आगे बढ़ने पर और खुलासे भी हो सकते हैं।