जान-जोखिम में डालकर हिमाचल के वीआईपी हवाई सफर कर रहे हैं। इसका खुलासा केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय (डीजीसीए) के गठित दुर्घटना जांच बोर्ड की रिपोर्ट से हुआ है। डीजीसीए ने हिमाचल के मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी को पत्र जारी कर पायलट पर अनावश्यक दबाव न बनाने की चेतावनी दी है। उत्तराखंड और अरुणाचल में भी ऐसी घटना घटित हो चुकी है। बचाव अभियान के दौरान उत्तराखंड में कुछ लोगों को चोटें आई थीं, जबकि अरुणाचल के मुख्यमंत्री को अपनी जान गवानी पड़ी थी। इसी का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्रालय ने आगाह किया है।
हिमाचल में पवन हंस कंपनी मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी के लिए हवाई सेवाएं उपलब्ध कराती रही है। करीब छह साल पहले सरकार का इस कंपनी के साथ करार हुआ था। रिपोर्ट में भी कहा है कि हिमाचल पहाड़ी राज्य है। ऐसे में कई पायलट यहां सेवाएं देने में उपयुक्त नहीं होते।
कई बार मुख्यमंत्री के अलग-अलग जिले में एक से ज्यादा कार्यक्रम होते हैं। समय की पाबंदी के चलते कार्यक्रमों में समय पर उनका पहुंचना जरूरी होता है। ऐसे में पायलट पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है।
नियमों के मुताबिक हेलीकॉप्टर की 150 किलोमीटर के सफर के बाद सर्विस और मरम्मत होना जरूरी होती है, मगर ऐसा नहीं हो पाता। हाल ही में सामने आई कैग की रिपोर्ट में भी हिमाचल सहित कई पहाड़ी राज्यों में पवन हंस के हेलीकॉप्टरों में प्रशिक्षित क्रू मेेंबर की तैनाती नहीं करने का मामला सामने आया है।
हिमाचल में पवन हंस का हेलीकॉप्टर छह महीने से खराब है। ऐसे में इस कंपनी ने करार खत्म होने तक किसी दूसरी कंपनी का हेलीकॉप्टर किराये पर लिया है। जनवरी 2020 में इस कंपनी का करार खत्म होना है। इसमें बाद स्काई वन कंपनी मुख्यमंत्री के लिए हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराएगी।