विजिलेंस ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) का तोड़ निकाल लिया है। विजिलेंस मैनुअल में शब्दों का हेरफेर कर यह तोड़ निकाला गया है। मैनुअल के चैप्टर दो में लिखे इंक्वायरी शब्द की जगह डिस्क्रीट वेरिफिकेशन (विवेकशील सत्यापन) पढ़ने को कहा गया है। इस बदलाव के बाद अब सरकार की अनुमति के बिना भी ब्यूरो वेरिफिकेशन के नाम पर जांच कर सकेगा।
नियमों में हुए इस बदलाव को ब्यूरो ने लागू भी कर दिया है। केंद्र ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में बड़ा संशोधन किया है। संशोधन के मुताबिक किसी भी सरकारी कर्मचारी, अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार या आय से अधिक समेत किसी भी तरह की शिकायत मिलने पर उसके नियोक्ता विभाग की मंजूरी जांच के लिए अनिवार्य हो गई है। हालांकि, अगर वह घूस मांगता हो तो ट्रैप करने के लिए मंजूरी की जरूरत नहीं है।