पांच लाख के लेन-देन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के वायरल ऑडियो मामले में अब विजिलेंस ब्यूरो का पूरा फोकस रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक रिपोर्ट पर है। अगर फोरेंसिक रिपोर्ट में ऑडियो में छेेड़छाड़ की बात सामने आई या ऑडियो से आवाज मिलान की पुष्टि न हुई तो पूरा केस ही ध्वस्त हो जाएगा, क्योंकि ठोस सबूत के नाम पर ब्यूरो के पास सिर्फ एक रिकॉर्डिंग है। इसके अलावा उसके पास परिस्थितिजन्य साक्ष्य तो हैं, लेकिन पैसे अब तक पकड़ में न आने की वजह से केस उतना मजबूत नहीं है।
सूत्रों के अनुसार जिस काम की पेमेंट के लिए घूस के पांच लाख का लेन-देन होना था, उसका टेंडर सही हुआ था। पेमेंट जारी करने को लेकर निदेशक और एजेंट के बीच तय हो रहा था, जिसका ऑडियो वायरल हुआ है। ऐसे में ब्यूरो हर रिकॉर्डिंग की रिपोर्ट के बाद ही आगे कदम बढ़ाना चाह रहा है। बता दें, गुप्ता और एजेंट की एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग वायरल हुई थी, जिसमें पांच लाख के लेन-देन की बात कही जा रही थी।
ब्यूरो ने स्वास्थ्य विभाग की सिफारिश पर एफआईआर दर्ज की और जांच में सहयोग न करने पर पूर्व निदेशक को गिरफ्तार कर लिया। करीब दस दिन तक वह जेल में रहा। इसके बाद ब्यूरो ने उससे व एजेंट से पहले अलग-अलग और फिर आमने सामने बैठाकर पूछताछ की। पूछताछ में जो जानकारी दोनों ने दी, वह ब्यूरो की पड़ताल से अलग थी। यही वजह है कि दोनों को ही शहर छोड़कर न जाने के लिए कहा गया है।