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मानसून सत्र के चौथे दिन भी हंगामा, विपक्ष ने किया वॉकआउट

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वन कटान पर भाजपा ने बुधवार को सदन से वाकआउट किया। मानसून सत्र के चौथे दिन भी भाजपा ने सदन के भीतर और बाहर खूब हंगामा किया। विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर चंबा और तारादेवी में हजारों पेड़ के कटान के आरोप लगाए। मुख्यमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र शिमला ग्रामीण में पेड़ कटान का मामला भी उठाया। प्रदेश विधानसभा में प्रश्नकाल के बाद विपक्ष ने सदन के भीतर नारेबाजी की।
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चंबा में 1807 पेड़ों के कटान की रिपोर्ट आने की बात कर वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी का इस्तीफा तक मांग लिया। इस बीच, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि पेड़ों की मार्किंग भाजपा शासनकाल में हो गई थी। अब विपक्ष इसका ठीकरा सत्ता पक्ष के सिर फोड़ रहा है। कहा कि भाजपा ने सत्ता में रहते हुए चंबा में हरे पेड़ों को मार्क कर दिया।

कहा कि मामला ध्यान में आने पर वन कटान में एफआईआर दर्ज की गई। इसमें 3 कर्मचारियों और वन विकास निगम के चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखे सवाल-जवाब के बीच प्रेम कुमार धूमल ने वाकआउट का ऐलान किया। भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने वन मंत्री के इशारे पर पेड़ों का कटान होने का आरोप लगाया। कहा कि अब वन मंत्री जड़ी-बूटियों को निशाना बनाए हुए हैं।
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सीएम बोले उल्टा चोर कोतवाल को डांटे

वन कटान मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र और विपक्ष के नेता प्रेम कुमार धूमल के बीच नोकझोंक के दौरान सीएम ने टिप्पणी की कि उल्टा चोर कोतवाल को बांटे। जवाब में धूमल बोले, चोर को पकड़ेंगे भी और डांटेंगे भी। जवाब पटल में सीएम बोले, सजा देने का काम मेरा होगा।

धर्मशाला शीतसत्र में उठाया था मामला
वाकआउट के बाद प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि चंबा और तारादेवी में पेड़ कटान का मामला धर्मशाला शीतसत्र में उठाया गया था। उस समय सीएम ने कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। इसके लिए सरकार ने कमेटी गठित की है।

कमेटी ने डेढ़ महीने पहले सरकार को रिपोर्ट सौंपी है, लेकिन सरकार कार्रवाई करने की बजाय दोषियों को बचने में लगी है। भाजपा सरकार ने जो पेड़ मार्क किए थे, सरकार ने उन्हें नहीं काटा। इनकी जगह दूसरे हरे-भरे पेड़ों को काट दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी का इस्तीफा मांगा।

जमीन घर के लिए ली और बना दिए होम स्टे

घर बनाने के नाम पर हिमाचल में जमीन लेकर बाहरी राज्यों के कई लोग इसका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। सोलन और सिरमौर जिलों में धारा-118 में फर्जीवाड़े के दस ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जमीन घर बनाने के लिए ली गई और बना दिए पर्यटकों को ठहराने के लिए होम स्टे। सरकार ने ऐसे तीन होम स्टे के पंजीकरण रद्द कर दिए हैं जबकि सात को नोटिस भेजे गए हैं।

यह खुलासा बुधवार को विधानसभा में कसुम्पटी से कांग्रेस विधायक अनिरुद्ध सिंह के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सोलन के कसौली रेजिडेंसी होम स्टे गांव मशोबरा कसौली, सरताज होम स्टे गांव खली कुमारहट्टी और सिरमौर में सोरामन रिट्रीट होम स्टे का पंजीकरण रद्द किया गया है।

गोल्डन हाइट्स रेजिडेंसी होम स्टे राजगढ़, ड्रीम लैंड होम स्टे पानवा कसौली, प्रीति होम स्टे गांव छट्टियां कसौली, गन्स एंड रोजेज होम स्टे नालवा कसौली, रोजेज एंड गन्स होम स्टे नालवा कसौली, कैप्टन नेस्ट होम स्टे खजडे़ट कसौली और सुखमणि निवास होम स्टे जुब्बड़ कसौली को नोटिस भेजे गए हैं।

बंदरों और आवारा पशुओं के आतंक से समूचा प्रदेश परेशान

विधानसभा में बुधवार को भाजपा की ओर से नियम 130 के तहत लाए गए लावारिस पशुओं, बंदरों और जंगली जानवरों के आतंकों से फसलों को हो रहे नुकसान पर हुई चर्चा में 21 विधायकों ने भाग लिया। विपक्ष नेता प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि प्रदेश में बंदरों की नसबंदी की स्कीम फेल है। उन्होंने कहा कि बंदरों की समस्या से समूचा प्रदेश प्रभावित है, इसलिए इन्हें खूंखार घोषित किया जाना चाहिए।

धूमल ने कहा कि सरकार को जंगली जानवरों को मारने पर लगी रोक को हटवाने के लिए भी सरकार को ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। विधानसभा उपाध्यक्ष जगत सिंह नेगी ने चर्चा में भाग लेते बंदरों को मारने का सुझाव भी दिया और इसके लिए टास्क फोर्स के गठन की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि बंदरों सहित अन्य जानवरों की वैज्ञानिक कलिंग के लिए धार्मिक भावनाओं से उपर उठकर काम करने की मांग की।

विधायक महेंद्र सिंह ने नियम 130 के तहत प्रदेश में जंगली जानवरों व आवारा पशुओं द्वारा जान माल एवं फ सलों को हो रही क्षति पर चर्चा पेश करते हुए कहा कि बंदर आज प्रदेश में फ सलों और फ लों के लिए  सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। विधायक रिखी राम कौंडल ने कहा कि प्रदेश में फसलों पर दोहरा हमला हो रहा है। दिन में जहां बंदर फ सल को तबाह कर रहे हैं वहीं रात को सुअर व अन्य जानवर फसलों पर हमला कर रहे हैं।

12,778 लोगों के गृह निर्माण पर फैसला अटका

प्रदेश सरकार ने 12 हजार 778 लोगों को गृह निर्माण के लिए बजट देने पर अभी फैसला नहीं लिया है। ये सभी आवेदन लंबित हैं। प्रश्नकाल में भाजपा विधायक रिखीराम कौंडल, जयराम ठाकुर और रणधीर शर्मा के सवाल के जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि एक जनवरी, 2013 से 15 फरवरी, 2015 तक प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को गृह निर्माण की मंजूरी के लिए 17,861 आवेदन मिले हैं।

सही पाए गए आवेदनों में से 5,083 ही मंजूर किए हैं। स्वीकृति के लिए शेष 12,778 आवेदन लंबित हैं। शांडिल ने कहा कि भवन निर्माण के मामलों को मंजूर करने पर निर्णय जिला स्तर की कमेटी करती है। लंबित मामलों का निपटारा किया जा रहा है। ऐसे लोगों को आवास सुविधा को बजट आवंटन पहले किया जा रहा है। जहां बाढ़, बारिश या अन्य कारणों से कोई गृहहीन हो गया हो, वहां पहले मकान बनाने को आर्थिक मदद दी जा रही है।

दो बार आर्थिक मदद मिली तो होगी रिकवरी
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि अगर किसी को मकान बनाने के लिए कहीं दो बार आर्थिक मदद दी गई है तो ऐसे मामलों में रिकवरी की जाएगी। शाहपुर की भाजपा विधायक सरवीण चौधरी ने कहा कि कुछ प्रधानों ने ऐसा किया है। इस पर मंत्री ने उनसे विस्तार से ब्योरा मांगा।

गौशालाओं के निर्माण को लेकर भी नीति बनाएगी कमेटी

प्रदेश के लोगों की जान और फसलों के लिए खतरा बन चुके बंदरों और जंगली जानवरों से निपटने को राज्य स्तरीय कमेटी बनेगी। कमेटी गौशालाओं के निर्माण को लेकर भी नीति बनाएगी। नियम-130 के तहत में चर्चा के बाद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा में यह बयान दिया। राज्य स्तरीय कमेटी में मुख्यमंत्री खुद शामिल होंगे।

नेता प्रतिपक्ष प्रो. प्रेमकुमार धूमल सहित विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा। कमेटी बंदरों और जंगली जानवरों की समस्या का समाधान तलाशेगी। सरकार बंदरों की प्रजनन क्षमता खुराक और दवा देने से कम करने की तैयारी में है। हाईकोर्ट में बंदरों को वर्मिंग घोषित करने को लेकर आवेदन भी करेगी। बंदरों के निर्यात पर पाबंदी हटाने की मांग केंद्र से की जाएगी।

वन मंत्री के बयान पर हंगामा, खुद बोले सीएम
नियम-130 के तहत भाजपा विधायक महेंद्र सिंह और रिखीराम कौंडल की ओर से लाए प्रस्ताव पर वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी जवाब देने लगे। वन मंत्री कागजात पढ़ कर जवाब देते रहे। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री ने स्थिति को संभालते हुए स्वयं खड़े होकर जवाब देना शुरू कर दिया। करीब दस मिनट तक मुख्यमंत्री ने जवाब दिया। पूरे सदन में इस दौरान चुप्पी रही।
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सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराहां को कब मिलेगा भवन

चौपाल विधानसभा क्षेत्र के सीनियर सेकेंडरी स्कूल सराहां में 400 बच्चे निजी भवन में पढ़ रहे हैं। इस स्कूल को कब सरकारी भवन मिलेगा? यह सवाल प्रश्नकाल के दौरान चौपाल के निर्दलीय विधायक बलवीर सिंह वर्मा ने उठाया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि उन्होंने शिक्षा विभाग को आदेश जारी कर दिए हैं कि इस बारे में तत्काल उचित कदम उठाए जाएं।

बलवीर वर्मा ने बताया कि निजी भवन में चलाए जा रहे इस भवन का शिक्षा विभाग की ओर से मालिक को किराया भी नहीं दिया जा रहा है। इसे खाली करने को नोटिस तक दिया गया है। वर्ष 2004 से किराया नहीं दिया गया है। दो कमरों के टेंडर लगे हैं, जबकि कमरे आठ चाहिए। स्कूल का भवन 2004 में असुरक्षित घोषित किया गया है।

उस समय मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि एक अच्छा भवन बनेगा, मगर आज तक यह नहीं बना। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल भवन के निर्माण का कार्य लोक निर्माण विभाग की ओर से ठेकेदार संदीप दीवान को दिया गया है। भवन निर्माण का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। सरकार स्कूल के कमरों का निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के लिए प्रयासरत है।
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