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शीत सत्र: पहले ही दिन 93 हजार करोड़ के एमओयू और जेओए भर्ती पर सत्तापक्ष को घेरेगा विपक्ष

Mon, 09 Dec 2019 12:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
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- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा शीत सत्र के पहले दिन सोमवार को दो से तीन बजे के बीच प्रस्तावित प्रश्नकाल में 93 हजार करोड़ के एमओयू साइन करने संबंधित सवाल नादौन के कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू करेंगे। पावर टिलर सब्सिडी में देरी, प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद करने, सिंगल विंडो में उद्योगों को क्लीयरेंस, एनएच में देरी, बागवानों से आढ़तियों की ठगी जैसे मामले उठाए जाएंगे।

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सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा नियम-62 के तहत जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के पदों पर भर्ती में गड़बड़ी का मामला उठाएंगे।  भाजपा विधायक रीता धीमान और सुखराम चौधरी नियम-130 के तहत विधवा और अपंग पेंशन के लिए ग्राम सभा से पारित प्रस्ताव में बदलाव का मामला उठाएंगे।
 
तपोवन विधानसभा परिसर के शीत सत्र में विपक्ष के सवालों के जवाब देने के लिए जयराम सरकार ने खाका तैयार कर लिया है। मिनी सचिवालय में मुख्यमंत्री जयराम की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में तय किया गया कि मुख्यमंत्री के अलावा मंत्री महेंद्र सिंह, विपिन सिंह परमार, सुरेश भारद्वाज, बिक्रम सिंह ठाकुर व गोविंद ठाकुर मोर्चा संभालेंगे।
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सरकार ने विपक्ष को उसी की भाषा में जवाब देने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री की अगुवाई में धर्मशाला के होटल धौलाधार में रणनीति बनाई। पहले दिन ही विपक्ष जयराम सरकार को इन्वेस्टर मीट पर घेरेगा। बैठक में स्कूल वर्दी, नशे के बढ़ते मामले सहित अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तय की है। नेता प्रतिपक्ष ने सभी विधायकों की जिम्मेदारी तय की है।

हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की कांग्रेस को सदन में कमी खलेगी। वीरभद्र स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण शीत सत्र के लिए तपोवन में नहीं आ रहे हैं। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में वीरभद्र सिंह के अलावा आशा कुमारी, जगत सिंह नेगी, धनी राम शांडिल भी नहीं पहुंचे।

विधानसभा के पटल पर रखे जाएंगे स्वीकृत नौ विधेयक
शीत सत्र में पहले दिन विधानसभा के पटल पर राज्यपाल से स्वीकृत नौ विधेयकों की एक-एक प्रति रखी जाएगी। इन विधेयकों में अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, निरसन विधेयक, प्रशासनिक अधिकरण (विनिश्चित मामलों और लंबित आवेदनों का अंतरण) विधेयक, धर्म की स्वतंत्रता विधेयक, आकाशी रज्जूमार्ग (संशोधन) विधेयक, मंत्रियों के वेतन और भत्ता संशोधन विधेयक, विधानसभा (सदस्यों के भत्ते और पेंशन) संशोधन विधायक, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष वेतन (संशोधन) विधेयक और लोक सेवा गारंटी (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक शामिल हैं।

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