चार दिन का मानसून सत्र सौहार्दपूर्ण माहौल में खत्म हो गया। अच्छे माहौल में कार्रवाई निपटने के लिए भले ही मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा अध्यक्ष और संसदीय कार्य मंत्री एक दूसरे की पीठ थपथपाते रहे। लेकिन चार दिन के इस सत्र के दौरान विधानसभा की कार्रवाई महज सवा तीन घंटे ही चली।
खास बात यह है कि इस सवा तीन घंटे की कार्रवाई के नाम पर आम जनता का लाखों रुपया पानी की तरह बहा दिया गया। सत्र के दौरान न तो जनता से जुड़े किसी मुद्दे पर चर्चा हो सकी और न ही कोई ठोस काम हुआ। जाहिर है जनता के पैसे को जनता के नाम पर आयोजित होने वाले सत्र में बर्बाद कर राजनेताओं ने अपनी रोटियां सेंक ली।
विधानसभा सत्र के चौथे दिन की शुरुआत विपक्ष के विधायकों के हंगामे के साथ हुई। भाजपा विधायकों ने नियम 67 के तहत सभी काम रोककर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह पर सीबीआई की ओर से कोर्ट में चार्जशीट पेश किए जाने के मुद्दे पर तत्काल चर्चा मांगी थी। सरकार से विपक्ष के प्रस्ताव पर कोई फैसला नहीं आया। शुक्रवार को कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने प्रस्ताव पर सवाल उठाया।
विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के चलते मांग खारिज कर दी। विधायक रविंद्र सिंह ने गुड़िया प्रकरण में पुलिस प्रशासन की ओर से लापरवाही बरतने का मामला उठाया। पुलिस पर उठाए सवालों को मुख्यमंत्री ने निराधार बताया।
कहा कि उन्होंने खुद सीबीआई जांच के लिए प्रधानमंत्री को पत्र लिखा और गृहमंत्री से बात की थी। विधायक सदन को झूठ बोलकर भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। महज पंद्रह मिनट ही सदन की कार्यवाही चली। हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने इसे 12 बजे तक स्थगित कर दिया। करीब सवा 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई।
तीन विधेयक, एक बिल पास, 50 प्रतिवेदन हुए स्थापित
इस बीच, मुकेश अग्निहोत्री ने गणेश चतुर्थी और अंतिम सत्र के आखिरी दिन को खुशी के साथ समाप्त करने की बात कही। विपक्ष से सुरेश भारद्वाज ने आश्वासन दिया कि अब विवाद नहीं होगा। इसके बाद सरकार ने एक के बाद एक कई प्रत्यावेदन और बहु प्रतीक्षित
मेडिकल यूनिवर्सिटी बिल पेश किया। इसके बाद विपक्ष के कुछ सुझावों और समर्थन के बाद सरकार ने बिल पास करा लिया। इसके बाद विस अध्यक्ष ने सभी को आने वाले विधानसभा चुनाव की शुभकामनाएं देते हुए सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
सत्र के समापन से पहले स्पीकर बुटेल ने बताया कि सत्र के दौरान कुल 4 बैठकें हुईं। इस दौरान 6 सरकारी विधेयक विस में पेश किए गए। इनमें 3 विधेयक पास हो गए।
एक वापस लिया गया। इसके अलावा विधानसभा की विभिन्न समितियों ने 50 प्रतिवेदन सभा में स्थापित किए। मंत्रियों ने भी अपने विभागों से संबंधित कई दस्तावेज सभा पटल पर रखे।
गर्मजोशी से मिले और विदा हो लिए
सुबह 11.15 बजे स्पीकर ने हंगामे के चलते 12 बजे तक कार्यवाही स्थगित की। उसके बाद हंगामे और टकराव को टालने की आखिरी कवायद शुरू हुई। संसदीय कार्य मंत्री के रूप में मुकेश अग्निहोत्री ने पहली बार टकराव टालने की कोशिश की। स्थगन के दौरान उन्होंने
हाउस के अंदर नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायकों से बात की। करीब पंद्रह मिनट बाद दोनों पक्ष अलग-अलग रास्तों पर चले गए। इसके बाद जब सत्र शुरू हुआ और कोई विवाद नहीं हुआ तो स्पष्ट हो गया कि उस मीटिंग के दौरान ही विवाद न करने पर समझौता हो गया था।
सत्र स्थगित होने के बाद संसदीय कार्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह वेल में आए और सीधे नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के पास चले गए।
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे से गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया और आने वाले चुनाव के लिए शुभकामनाएं दीं। इसके बाद एक-एक कर भाजपा और कांग्रेस विधायकों ने भी एक-दूसरे से हाथ मिलाया और विदा हो गए। इसके बाद स्पीकर बुटेल ने भी सभी सदस्यों से मुलाकात की।