नगर निगम वार्डों को घटाने के विधेयक पर बुधवार को सदन में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम के बीच नोकझोंक हुई। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने प्रश्नकाल समाप्त होने के बाद सरकार की व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कहा कि नगर निगम शिमला के चुनाव घोषित होने के बाद वार्डों को कम करने का विधेयक लाया गया। उन्होंने वाटर सेस विधेयक पारित करने पर भी सवाल उठाए। कहा कि विपक्ष की गैरहाजिरी में वार्डों की संख्या 41 से 34 की गई। इस बारे में अध्यादेश लाकर पहले ही ये वार्ड घटा दिए गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों ने सदन में हंगामा किया। करीब 20 मिनट तक हंगामे के बीच विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया।
संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि विधेयक को लेकर अगर इतनी चिंता थी तो मंगलवार को चर्चा करते। सदन से बाहर चले गए। इससे लगता है कि ये गंभीर नहीं हैं। विपक्ष ने विधेयक ही नहीं पढ़ा। जब विधेयक पास हो गया। अब मामले को उठा रहे हैं। यह तो वर्तमान सरकार का अधिकार है कि किसी भी कानून को अध्यादेश के माध्यम से कर सकते हैं। पिछली जयराम सरकार ने भी कई अध्यादेश लाए। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने व्यवस्था दी कि यह मुद्दा देरी से उठाया जा रहा है।
वह इस पर कोई बात नहीं करेंगे। विपक्ष न तो चर्चा के लिए उपस्थित था और न ही इस विधेयक के परिचय से पहले ही कोई आपत्ति आई। इस बीच नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर बोलने के लिए खड़े हुए, लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें बोलने से मना कर दिया। इस बीच मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इन्हें बोलने दीजिए। स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा - आपको सबसे ज्यादा समय मिलता है। आप सेंसिटिव न हों। जयराम बोले - यह दायित्व बनता है कि हम सम्मान करेंगे। विधेयक पारित हो गया।
आप अंदाजा लगाइए कि वह देख रहे हैं कि तीन बार नियमों में संशोधन किए गए। यानी, चुनाव आयोग ने जो काम करना था, वह सरकार कर रही है। आयोग को पंगु बना दिया गया है। हद तो यह हो गई कि आयोग ने जो वार्ड निर्धारित किए थे। इस पर सरकार का आदेश हो गया कि 41 से 34 किए जाएंगे। जयराम बोले - हमने इसलिए किया था कि जनसंख्या को दृष्टिगत रखा। पुनर्सीमांकन का मतलब है कि युक्तिकरण किया जाए। रोस्टर भी उल्टा कर दिया गया है। सबको उल्टा कर रहे हैं।
कहीं आप भी उल्टे न हो जाएं। एक व्यक्ति एक ही स्थान पर स्थायी निवासी हो सकता है। दो स्थान पर नहीं हो सकता है। नगर निगम का चुनाव जीतने के लिए रातोंरात 11 हजार नए वोट बना दिए गए। व्यवस्था के नाम पर आप बहुत बोल रहे हैं। लोगों को अच्छी तरह से मालूम है कि आप यह क्यों कर रहे हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने कहा - पूर्व सीएम गुस्सा नहीं करते। आपको बोलने दिया गया। यह व्यवस्था परिवर्तन ही है। वाकआउट करना इनका मकसद है। इस ढंग से आगे नहीं बढ़ा जाता।
नगर निगम के चुनाव विधानसभा चुनाव से पहले करने अनिवार्य हैं। ऐसी व्यवस्था लाई कि चुनाव नहीं हुए। वार्डों की संख्या घटाने के लिए अध्यादेश लाकर कानून बनाया गया। बार-बार महिलाओं की एक ही सीट आरक्षित हो रही थी। अन्य को भी मौका नहीं दिया। हाईकोर्ट गए तो वहां भी संज्ञान नहीं लिया गया। अच्छा काम करें तो इनको पसंद नहीं है। विधेयक पर भी चर्चा में भाग लेते तो अच्छा होता। यह व्यवस्था परिवर्तन सब लोगों के भले के लिए किया गया।
विपक्ष को प्रदेश के हित में लाए गए विधेयक पर चर्चा में भी भाग लेना चाहिए। इसे शिमला के हित में किया गया है। स्पीकर ने कहा कि पिछले कल वाकआउट के बाद अंदर आ जाते तो कौन रोक रहा था। आप आसन को एक्यूज नहीं कर सकते। इसका अधिकार नहीं है। इस पर सदन में विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। सदन से विपक्ष ने वाकआउट कर दिया। विपक्ष ने सदन के बाहर भी नारेबाजी की। वाकआउट के बाद उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि वाटर सेस से हिमाचल की जनता को फायदा होगा। इससे 4000 करोड़ की सालाना आय होगी।