याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में चहेतों को नौकरी दी गई, जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए स्टेटस को रखने के आदेश जारी किए।
इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। अब पंकज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली है। इसी को आधार बनाकर पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ ने ट्रिब्यूनल में चुनौती देकर शिक्षकों को नियमित करने की गुहार लगाई है।