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फोरथ क्लास कर्मचारियों को लेकर ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला, लगी रोक

Fri, 22 Dec 2017 11:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने फोरथ क्लास कर्मचारियों से क्लर्कों की भर्ती करने प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह भर्ती राज्य कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर के माध्यम से करवाई जा रही है। ट्रिब्यूनल ने विज्ञापित 119 पदों के बजाय 275 क्लर्कों की भर्ती की इस प्रक्रिया पर यथास्थिति बनाने के आदेश दिए हैं।
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न्यायिक सदस्य डीके शर्मा और प्रशासनिक सदस्य प्रेम कुमार की खंडपीठ ने जय सिंह की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किए हैं। मामले के अनुसार फरवरी 2017 में राज्य सरकार ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों में से क्लर्कों की सीधी भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। विज्ञापन के अनुसार क्लर्कों के कुल पदों की संख्या 119 थी।

इस भर्ती प्रक्रिया का काम राज्य कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर को सौंपा गया था। कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर ने 119 पदों के बजाय 275 पदों को भरने के लिए ली गई लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने आयोग के इस परिणाम को यह कहकर चुनौती दी कि जब आवेदन 119 पदों के लिए मांगे गए थे तो किन परिस्थितियों में 275 पदों को भरने की घोषणा कर दी गई। ट्रिब्यूनल ने आयोग को दो हफ्तों में इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के आदेश दिए हैं। मामले पर सुनवाई पांच जनवरी को होगी।

बिना पंजीकरण, प्रदूषण फैलाने वाले होटलों, उद्योगों पर हाईकोर्ट सख्त

हिमाचल हाईकोर्ट
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने पर्यटन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आदेश दिए हैं कि वह हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास पंजीकरण अधिनियम और जल प्रदूषण अधिनियम के प्रावधानों की अक्षरश: पालना सुनिश्चित करें।

इसके लिए सरकार सार्वजनिक नोटिस जारी करे। कोर्ट ने कुल्लू और कांगड़ा जिला की तरह प्रदेश के सभी जिलों में इन अधिनियम के प्रावधानों की पालना को सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने चेताया कि प्रावधानों की अनुपालना न करने पर उनके भी बिजली व पानी के कनेक्शन काट लिए जाएं।

प्रदेश उच्च न्यायालय ने जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम और हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास पंजीकरण अधिनियम 2002 के प्रावधानों की अनदेखी करने पर कांगड़ा के 49 होटलों के बिजली-पानी कनेक्शन काटने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट की ओर से पिछले आदेशों की अनुपालना में उपनिदेशक पर्यटन कांगड़ा ने न्यायालय को बताया कि 217 औद्योगिक इकाइयां, होटल और गेस्ट हाउस उनके पास पंजीकृत हो चुके हैं। जबकि 49 संस्थान बिना पंजीकरण के चल रहे हैं। 
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कहा, फिर भी नहीं हुआ सुधार तो काट दो बिजली-पानी के कनेक्शन

इस पर संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने इन संस्थानों के पानी और बिजली के कनेक्शन काटने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन बड़े स्तर पर विकसित होना चाहिए। प्रयास यही होने चाहिए कि किसी भी तरह से इस मुहिम में कमी न आए। कोर्ट ने कहा कि जो लोग प्रदेश में इन व्यवसायिक संस्थानों को चला रहे हैं वह शायद इन संस्थानों को चलाने के लिए बनाए गए कानूनों व नियमों से अनभिज्ञ हैं।

वह अपने संस्थानों को कानूनी तौर पर चलाने के लिए पंजीकरण नहीं करवा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि हालांकि इसके लिए कानून के ज्ञान का न होने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। फिर भी यह संबंधित विभागों के सक्षम अधिकारियों का दायित्व बनता है कि वह इन लोगों को इस विषय में जानकारी दें।

कोर्ट ने कहा कि प्रदेश भर में स्थापित की गई औद्योगिक इकाइयों, विभिन्न तरह के संस्थानों व होटलों की एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाए। कोई कड़ा कदम उठाने से पहले यह जरूरी हो जाता है कि इन्हें कानून के प्रावधानों के विषय में पूर्णतया जानकारी हासिल हो जाए।

उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोर्ट को बताया कि उनके द्वारा की गई जांच में पाया गया है कि नगर निगम धर्मशाला, मैकलोडगंज और नड्डी में 116 इकाइयां अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन कर रही हैं। कोर्ट के आदेशों की अनुपालना में इनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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