साल 2017 में कोर्ट का फैसला पूर्व सैनिकों के खिलाफ आ चुका है। सरकार ने भी सैनिकों को वरिष्ठता लाभ न देने की अधिसूचना जारी की है। मंच ने मांग की है कि शीघ्र पूर्व सैनिकों की साल 2008 की स्थिति के अनुुसार नए सिरे से वरिष्ठता सूची बनाई जाए।
जिन पूर्व सैनिकों को गलत एवं असंवैधानिक तरीके से अस्थाई तौर पर पदोन्नत किया गया है, उन्हें उनके मूल पदों पर वापस नियुक्त किया जाए। योग्य प्रधानाचार्यों की अस्थाई नियुक्तियों को नियमित पदोन्नति में बदला जाए।
उन्हें सभी देय वित्तीय लाभ उनकी नियुक्ति की तिथि से दिए जाएं। प्रदेश में करीब 1200 प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन और भत्ते नहीं पा रहे हैं। कई ऐसे प्रधानाचार्य हैं, जो दस साल से आर्थिक लाभ को तरस रहे हैं।
मंच ने शिक्षा निदेशक से मांग की कि पूर्व सैनिकों की पदोन्नतियों को भी तुरंत रद्द कर उन्हें उनके मूल पद पर नियुक्त कर नई वरिष्ठता सूचियां जारी की जाएं।