उन्होंने भू अभिलेखों को ऑनलाइन करने को कहा ताकि किसान अनावश्यक औपचारिकताओं से बच सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को ऋण के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है।
इसके तहत 25 प्रतिशत निवेश अनुदान का प्रावधान है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री आजीविका योजना भी पहली अप्रैल से शुरू होगी, इसके तहत निवेश के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 30 लाख रुपये तक ऋण प्रदान किया जाएगा।
प्रदेश में मौजूद सभी बैंकों में से हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक का एनपीए सबसे अधिक है। ग्रामीण बैंक का एनपीए 10.61 फीसदी पहुंच गया है। दूसरे नंबर पर प्रदेश के सहकारी बैंकों का एनपीए सबसे अधिक है। राज्य सहकारी बैंक, कांगड़ा सहकारी बैंक, जोगिंद्रा सहकारी बैंक का कुल एनपीए 9.68 फीसदी है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी नेे बताया कि हिमाचल प्रदेश के सभी बैंकों का कुल एनपीए 5.95 फीसदी है। रिकवरी की प्रक्रिया धीमी होने के चलते ऐसे आंकड़े सामने आए हैं।
उन्होंने एनपीए घटाने के लिए तहसीलदार रिकवरी के ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कहा, प्रदेश के सभी बैंक अधिकारियों को एनपीए घटाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बैंकों को आगामी 31 मार्च तक शत प्रतिशत खातों को आधार से जोड़ने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि बीमा दावों का निपटारा समयबद्ध किया जाना चाहिए।
इसी प्रकार अटल पेंशन योजना में कम नामांकन पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य में 27 लाख लोगों को शामिल किया जा सकता है।
प्रदेश में बैंकों की कर्ज सीमा तीन हजार करोड़ बढ़ने से हर वर्ग को फायदा मिलेगा। बैंक अधिक ऋण आवेदनों को निस्तारित कर सकेंगे। किसानी-बागवानी में अधिक किसानों को कर्ज मिल सकेगा।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों के लिए अधिक निवेश हो पाएगा। स्वरोजगार के क्षेत्र में दिए जाने वाले कर्ज की संख्या में इजाफा होगा। इसके अलावा आवासीय और शिक्षा के लिए अधिक कर्ज मिल सकेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक अमरनाथ ने कहा कि बैंकों को वित्तीय समावेश अभियान पर जमीनी स्तर पर जोर देने कि आवश्यकता है ताकि बैंकिंग सेवाएं प्रभावशाली तरीके से समाज के हर स्तर तक पहुंच सके।
नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक किशन सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी हित धारकों द्वारा समन्वित प्रयासों की जरूरत है।
कृषि क्षेत्र के विकास के लिए संस्थागत ऋण की मात्रा में वृद्धि पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर यूको बैंक के उपमहाप्रबंधक विवेक कौल सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निगमों, बोर्डों, बैंकों व बीमा कंपनियों के अधिकारी मौजूद रहे।