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हिमाचल को इतने हजार करोड़ का कर्ज देंगे बैंक, बैंकर्स समिति की बैठक में निर्णय

Tue, 20 Mar 2018 09:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
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राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 147वीं बैठक शिमला में आयोजित की गई।हिमाचल प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2018-19 में बैंकों द्वारा 25 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दिया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2018-19 में तीन हजार करोड़ का अतिरिक्त कर्ज दिया जाएगा। 

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सोमवार को राजधानी शिमला में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की 147वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2018-19 के लिए वार्षिक क्रेडिट प्लान बनाने का काम नाबार्ड ने शुरू कर दिया है। 

भारत सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते साल की कर्ज सीमा 22 हजार करोड़ को बढ़ाकर 25 हजार करोड़ कर दी है। नाबार्ड के माध्यम से यह कर्ज दिए जाएंगे। बाल्दी ने प्रायोजित योजनाओं में ऋण प्रदान करने के लिए प्रक्रिया के सरलीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। 

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हिमाचल ग्रामीण बैंक का एनपीए सबसे ज्यादा

उन्होंने भू अभिलेखों को ऑनलाइन करने को कहा ताकि किसान अनावश्यक औपचारिकताओं से बच सकें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान को ऋण के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। राज्य में पहली बार मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना की घोषणा की गई है।

इसके तहत 25 प्रतिशत निवेश अनुदान का प्रावधान है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री आजीविका योजना भी पहली अप्रैल से शुरू होगी, इसके तहत निवेश के लिए 80 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 30 लाख रुपये तक ऋण प्रदान किया जाएगा।

प्रदेश में मौजूद सभी बैंकों में से हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक का एनपीए सबसे अधिक है। ग्रामीण बैंक का एनपीए 10.61 फीसदी पहुंच गया है। दूसरे नंबर पर प्रदेश के सहकारी बैंकों का एनपीए सबसे अधिक है। राज्य सहकारी बैंक, कांगड़ा सहकारी बैंक, जोगिंद्रा सहकारी बैंक का कुल एनपीए 9.68 फीसदी है। 

खातों को 31 मार्च तक आधार से जोड़ने का लक्ष्य

अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी नेे बताया कि हिमाचल प्रदेश के सभी बैंकों का कुल एनपीए 5.95 फीसदी है। रिकवरी की प्रक्रिया धीमी होने के चलते ऐसे आंकड़े सामने आए हैं।

उन्होंने एनपीए घटाने के लिए तहसीलदार रिकवरी के ढांचे को मजबूत करने पर बल दिया। कहा, प्रदेश के सभी बैंक अधिकारियों को एनपीए घटाने के लिए विशेष प्रयास करने चाहिए।

अतिरिक्त मुख्य सचिव ने बैंकों को आगामी 31 मार्च तक शत प्रतिशत खातों को आधार से जोड़ने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि बीमा दावों का निपटारा समयबद्ध किया जाना चाहिए।

इसी प्रकार अटल पेंशन योजना में कम नामांकन पर भी उन्होंने चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत राज्य में 27 लाख लोगों को शामिल किया जा सकता है।

कर्ज सीमा बढ़ने से हर वर्ग को होगा फायदा

प्रदेश में बैंकों की कर्ज सीमा तीन हजार करोड़ बढ़ने से हर वर्ग को फायदा मिलेगा। बैंक अधिक ऋण आवेदनों को निस्तारित कर सकेंगे। किसानी-बागवानी में अधिक किसानों को कर्ज मिल सकेगा।

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों के लिए अधिक निवेश हो पाएगा। स्वरोजगार के क्षेत्र में दिए जाने वाले कर्ज की संख्या में इजाफा होगा। इसके अलावा आवासीय और शिक्षा के लिए अधिक कर्ज मिल सकेगा। 


 
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वित्तीय समावेश पर बल देने की जरूरत

भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक अमरनाथ ने कहा कि बैंकों को वित्तीय समावेश अभियान पर जमीनी स्तर पर जोर देने कि आवश्यकता है ताकि बैंकिंग सेवाएं प्रभावशाली तरीके से समाज के हर स्तर तक पहुंच सके।

नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक किशन सिंह ने कहा कि भारत सरकार ने 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी हित धारकों द्वारा समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

कृषि क्षेत्र के विकास के लिए संस्थागत ऋण की मात्रा में वृद्धि पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2018-19 में 11 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस अवसर पर  यूको बैंक के उपमहाप्रबंधक विवेक कौल सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, निगमों, बोर्डों, बैंकों व बीमा कंपनियों के अधिकारी मौजूद रहे। 
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