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घटते राजस्व के बीच फिर कर्ज लेगी हिमाचल सरकार, प्रतिभूतियां बेचने की तैयारी

Sat, 18 Nov 2017 09:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश में घटते राजस्व के बीच एक बार फिर सरकार तीन सौ करोड़ का कर्ज ले रही है। 53 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी प्रदेश सरकार चालू वित्तीय वर्ष में पांचवीं बार कर्ज लेगी, जबकि अभी एक वित्तीय तिमाही शेष है। 
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चुनाव नतीजों से ठीक पहले कर्ज लेने से साफ है कि आने वाली सरकार को आर्थिक फ्रंट पर जूझना होगा। मतदाताओं को रिझाने के लिए सैकड़ों चुनावी घोषणाओं को पूरा करना नई सरकार के लिए आसान नहीं होगा। सरकार मौजूदा वित्तीय वर्ष में लगभग पौन ढाई हजार करोड़ का ऋण ले चुकी है।

सरकार ने 10 साल की अवधि के साथ 300 करोड़ रुपये की राशि के लिए नीलामी के माध्यम से प्रतिभूतियां बेचने की पेशकश की है। सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर दो माह बाद दोबारा कर्ज लेने की नौबत क्यों आई है। 
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आरबीआई के मुंबई कार्यालय में 21 नवंबर को नीलामी की जाएगी। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक कोर बैंकिंग समाधान प्रणालियों के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में नीलामी के लिए बोलियां जमा की जा सकती हैं। 

वित्तीय संकट से जूझ रही सरकार के वार्षिक बजट प्लान का अधिकांश हिस्सा कर्मचारी वेतन और पेंशन में जाता है। ऐसे में विकास कार्यों के लिए सरकार को केंद्र पोषित योजनाओं या फिर कर्ज पर ही निर्भर होना पड़ता है।
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जीएसटी का असर

जीएसटी काउंसिल की बैठक में सरकार ने राजस्व में चालीस प्रतिशत तक कमी की बात रखी थी। नई कर प्रणाली जीएसटी को इसके लिए बड़ा जिम्मेदार माना गया।

हालांकि, नई कर प्रणाली के लागू होने से राजस्व घाटे की भरपाई केंद्र करेगा, लेकिन यह राशि अगले वित्तीय वर्ष में मिलेगी। ऐसे में सरकार को अगली तिमाही के लिए अतिरिक्त ऋण लेना पड़ सकता है।
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कैसे पूरी होंगी घोषणाएं

भाजपा और कांग्रेस ने चुनाव घोषणापत्र में कई ऐसी घोषणाएं की हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए करोड़ों का फंड चाहिए। कर्मचारियों से संबंधित 4-9-14 टाइम स्केल, पेंशन बहाली और अनुबंध की समयावधि घटाने जैसी घोषणाओं के लिए फंड जुटाना बेहद मुश्किल दिख रहा है।

ऋण की क्रेडिट लिमिट के अनुसार सरकार अभी लगभग एक हजार करोड़ और ले सकती है, लेकिन विकास कार्यों के साथ कर्मचारियों को खुश करना आसान नहीं होगा। इन कार्यों के लिए पैसा जुटाना नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौति रहेगी। 
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