सोलन सदर विधानसभा क्षेत्र में करीब पौने पांच साल के कार्यकाल में विधायक निधि की धनवर्षा तो खूब हुई। लेकिन खर्च का संतुलन सामान्य न होने से कई इलाके खासतौर पर शिमला से सटी पंचायतें सूखी रह गईं। इन पंचायतों को महज एक से तीन लाख रुपये तक का ही बजट मिल पाया।
जबकि विधायक निधि से कुछेक पंचायतों की झोली में 15-15 लाख रुपये या इससे भी ज्यादा पैसा बरसा। कांग्रेस ने बजट को जरूरत के हिसाब से देने का दावा किया है जबकि भाजपा इसे वोटबैंक की राजनीति बता रही है। कंडाघाट ब्लॉक की शिमला से सटी कई ऐसी पंचायतें हैं जहां विधायक निधि न के बराबर खर्च हुई है।
विधायक निधि में पर्यटन स्थल चायल को भी कोई तवज्जो नहीं मिली। चायल में महज एक कार्य के लिए एक लाख रुपये की राशि पिछले पौने पांच साल में जारी हुई। ऐसा ही हाल शिमला जिला की सीमा पर बसी बाकना पंचायत का भी है। यहां विधायक निधि से डेढ़ लाख रुपये विकास कार्य को मंजूर हो पाए हैं।
इसके साथ ही सिरिनगर, तुंदल व कारला में दो लाख से साढ़े तीन लाख रुपये तक की राशि विकास कार्य पर खर्च की गई। दूसरी तरफ नगर परिषद सोलन में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 15 लाख से ज्यादा की धनराशि मंजूर की जा चुकी है। सर्वाधिक विधायक निधि हासिल करने वाली सोलन विधानसभा की पंचायतों में जेठना पंचायत में साढ़े 17 लाख, सकोटी में 13 लाख, देलगी 12.80 लाख,
बजनी में 12 लाख, ममलीग में 12 ल लाख 30 हजार, हिन्नर में 12 लाख और माही में 11 लाख 50 हजार रुपये शामिल है। पंचायतों में विधायक निधि के बजट के असंतुलन पर भाजपा ने कांग्रेस को राजनीति से प्रेरित बताया है। जबकि कांग्रेस समान विकास की बात कर रही है।
कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष बलदेव ठाकुर का कहना है कि विधायक निधि से पूरी विधानसभा में विकास के प्रयास किए गए हैं। जिन पंचायतों को धन की ज्यादा जरूरत थी उनमें इसका वितरण उसी हिसाब से किया गया। भाजपा नेता व पार्टी की प्रत्याशी रह चुकीं कुमारी शीला का कहना है कि कांग्रेस ने वोट बैंक पक्का करने की राजनीति खेली है। उन्हीं पंचायतों में धन वितरित किया गया जहां से कांग्रेस को वोट मिले थे।