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हिमाचल: प्रदेश में गायब बैलेट पेपर के सीरियल नंबर जारी, चुनाव आयोग ने दिखाई सख्ती

Tue, 26 May 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

 प्रदेश में बैलेट पेपर गायब होने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग की तरफ से प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी कर इन बैलेट पेपर पर ध्यान रखने को कहा गया है।
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हिमाचल निर्वाचन आयोग। - फोटो : ईसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बैलेट पेपर गायब होने के मामले में राज्य निर्वाचन आयोग ने सख्ती दिखाई है। आयोग की तरफ से प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र जारी कर इन बैलेट पेपर पर ध्यान रखने को कहा गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि गायब बैलेट पेपर मान्य नहीं होंगे। बाकायदा गायब हुए बैलेट पेपरों के सीरियल नंबर जिला निर्वाचन अधिकारियों के साझा किए गए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने कहा है कि बैलेट पेपर गायब होना गंभीर विषय है। इसकी जांच चल रही है।

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बिलासपुर में प्रधान पद के 58001 से लेकर 58050 तक 50 बैलेट पेपर गायब हुए हैं। इसी तरह जिला मंडी में प्रधान पद के ही 3566321 से लेकर 3566350 बैलेट पेपर नहीं मिल रहे हैं। इसी तरह कुनिहार में 2 और नादौन में 1 बैलेट पेपर गायब है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को सर्तकता बरतने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि इस तरह की लापरवाही सहन योग्य नहीं होगी। राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि शरारती तत्व इन बैलेट पेपर कहीं भी किसी भी डाल सकते हैं। ऐसे में आयोग को इन सीरियल नंबर को ध्यान में रखते हुए अनवैलिड करने को कहा गया है। चू्ंकि प्रधान पद के बैलेट पेपर का रंग एक जैसा है। ऐसे में गड़बड़ी की संभावना रहती है।
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आयोग ने मुख्य सचिव के मांगा स्पष्टीकरण

पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों के बीच राज्य सरकार की कैबिनेट बैठकों में लिए जा रहे फैसलों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग सख्त हो गया है। आयोग ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता को पत्र लिखकर इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। आयोग ने साफ कहा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान कैबिनेट की बैठक तो की जा सकती है, लेकिन ऐसी बैठकों में जनहित से जुड़े नए फैसले नहीं की जा सकतीं। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक नेता कर्ण नंदा ने आयोग से इस मामले में शिकायत की थी कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सरकार की ओर से कुछ ऐसे निर्णय लिए जा रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव मतदाताओं पर पड़ सकता है।
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