इसके बाद घरवालों की डांट सुननी पड़ी। डांट के बाद स्कूल में शिक्षकों से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रयोग के दौरान सुरक्षा को लेकर प्रश्न पूछे, तब सेंसर का नाम सुनकर मॉडल बनाने का विचार आया। उन्होंने सोचा कि यदि किसी सेंसर की मदद से इस्त्री की गतिविधि पर नजर रखी जाए, तो कपड़ों को नुकसान होने से बचाया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने सेंसर आधारित सुरक्षा तंत्र पर काम शुरू किया। कई दिनों तक अध्ययन के बाद शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने एक ऐसा मॉडल तैयार कर लिया, जो संभावित खतरे को पहले ही पहचान लेता है।
अर्पण ने स्मार्ट सेफ्टी आयरन में विशेष सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर लगातार यह देखते हैं कि इस्त्री चल रही है या लंबे समय से एक ही जगह पर स्थिर है। यदि इस्त्री सामान्य रूप से उपयोग हो रही है, तो वह लगातार काम करती रहती है लेकिन जैसे ही सेंसर यह महसूस करता है कि इस्त्री काफी देर से बिना हिले-डुले एक स्थान पर रखी है, तो सुरक्षा प्रणाली सक्रिय हो जाती है। इसके बाद बिजली की आपूर्ति नियंत्रित होती है और जरूरत पड़ने पर हीटिंग स्वयं बंद जाती है। इससे कपड़े जलने से बच जाते हैं और दुर्घटना की संभावना भी कम हो जाती है। अर्पण ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और शिक्षकों को दिया है।