भारती ने सरकार और संगठन के बीच बढ़ती दूरी को भी चिंता का विषय बताते हुए कहा था कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा। उनके इन बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में लगातार चर्चाएं चल रही थीं और पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।
उल्लेखनीय है कि हाल के दिनों में सरकार और संगठन को लेकर की गई टिप्पणियों के बाद नीरज भारती को जिला कांग्रेस अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। अब इस्तीफा मंजूर होने के साथ ही कांग्रेस उपाध्यक्ष पद पर उनका अध्याय औपचारिक रूप से समाप्त हो गया है। नीरज भारती के इस्तीफे की स्वीकृति को प्रदेश कांग्रेस के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है और आने वाले समय में इसके राजनीतिक मायनों को लेकर चर्चाएं और तेज होने की संभावना है।
ओबीसी कल्याण मंडल के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल स्वरूप कोहली और घृत वाहती चाहंग महासभा के प्रदेश अध्यक्ष श्रीकंठ चौधरी ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की सुक्खू सरकार ओबीसी वर्ग के प्रति संवेदनहीन रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि केवल नीरज भारती ही नहीं, बल्कि पूरे ओबीसी समाज के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कर्नल स्वरूप कोहली के नेतृत्व में पिछले साढ़े तीन वर्षों से ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को विभिन्न संवैधानिक मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपते रहे हैं। बजट सत्र के दौरान कृषि मंत्री के नेतृत्व में कर्नल स्वरूप कोहली, श्रीकंठ चौधरी, डॉ. रमेश कौंडल, राजिंद्र कुमार, रमेश चंद, कर्नल दीप सहित अन्य प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर ओबीसी वर्ग की मांगें रखी थीं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने मांगों को गंभीरता से सुनते हुए उन्हें लागू करने का आश्वासन दिया था। वहीं कृषि मंत्री ने भी 93वें संविधान संशोधन सहित अन्य लंबित मांगों को लागू करने के संबंध में दो बार पत्र लिखकर ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय दिलाने की पैरवी की थी। इसके बावजूद आज तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से नीरज भारती का इस्तीफा भी ओबीसी समाज की उपेक्षा और उनकी आवाज को अनसुना किए जाने का परिणाम है।