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हिमाचल में रेत-बजरी की डंपिंग पर रोक

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हिमाचल सरकार ने प्रदेश में रेत-बजरी की डंपिंग पर रोक लगा दी है। यदि किसी क्षेत्र विशेष में रेत और बजरी के ढेर पाए गए तो उस क्षेत्र के खनन अधिकारी की जिम्मेदारी होगी।
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रात 8 से सुबह 6 बजे तक खनन पर रोक रहेगी। जनरेटर से स्टोन क्रशर चलाने पर भी रोक लगा दी गई है। इस बारे में सभी डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (उपायुक्त) अलग से अधिसूचना जारी करेंगे।

शिमला में राज्यभर के खनन अफसरों से बैठक के बाद प्रेस वार्ता में ये जानकारी उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने दी। उद्योग मंत्री ने कहा कि राज्य में इस समय करीब 300 क्रशर और 345 माइनिंग लीज हैं।
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रेत-बजरी स्टोर हुई तो, माइनिंग अफसर जिम्मेदार होगा : मुकेश

इनमें से 116 की लीज चल रही हैं। 188 पर्यावरण मंजूरी के बिना अटकी हैं। राज्य में केवल 17 लोगों के पास मंजूरी है। केंद्र सरकार से मंजूरी न मिलने के कारण राज्य स्तरीय कमेटी का गठन भी नहीं हो पाया है।

अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को पत्र भेज रही है। इसमें वह आग्रह करेंगे कि केंद्र सरकार पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया तेज करे और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सामने पक्ष रखे ताकि नदी किनारे खनन पर लगी रोक को हटाया जा सके।

राज्य सरकार मांग करेगी कि जब तक लंबित आवेदन क्लीयर नहीं हो जाते, तब तक कम से कम 2 साल तक पर्यावरण मंजूरी की बाध्यता हटाई जाए। प्रेस वार्ता में उद्योग मंत्री के साथ उद्योग निदेशक राजेंद्र सिंह और स्टेट जियोलॉजिस्ट इंद्रेश धीमान भी थे।
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बार्डर जिलों में खनन अफसरों को गाडि़यां

खनन विभाग की बैठक में फैसला लिया गया कि अवैध खनन रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों सोलन, सिरमौर, कांगड़ा और ऊना में खनन अफसरों को गाडि़यां दी जाएंगी। 1357 कोर्ट केस झेल रहे खनन विंग में एक लॉ आफिसर की नियुक्ति की जाएगी। हेडक्वार्टर में फ्लाइंग स्क्वायड बनेंगे, जिसमें खनन विंग और पुलिस के लोग होंगे।

उद्योग मंत्री ने कहा कि रोड कटिंग, फिश पोंड और अन्य विकास कार्यों के लिए खनन मंजूरी अब एक साल के भीतर देंगे। मंजूरी उन्हीं मामलों में मिलेगी, जो पर्यावरण मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में खदानों की नीलामी होगी और 3 हेक्टेयर तक क्षेत्र में हिमाचलियों को आरक्षण होगा। इससे ऊपर हिमाचलियों को 10 फीसदी प्राथमिकता मिलेगी।
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