पुलिस की क्यूआरटी मौके पर पहुंची और प्रदर्शनकारियों को सदन से बाहर निकाला। वहीं, मासिक बैठक में शामिल होने जा रहे पार्षद और अफसर भी भीड़ के बीच धक्के खाते हुए सदन तक पहुंचे। बर्खास्त किए 41 सैहब कर्मचारियों की सेवा बहाली की मांग को लेकर सीटू और सैहब कर्मचारी यूनियन ने दोपहर 2:00 बजे सीटीओ चौक पर प्रदर्शन किया। दोपहर 2:15 बजे प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी रैली निकालते हुए बचत भवन के बाहर पहुंचे। यहां जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। 2:20 बजे यह सभी बचत भवन में जाने लगे जहां 2:30 बजे से निगम की मासिक बैठक होनी थी। पुलिस ने इन्हें गेट पर रोक लिया। 2:40 बजे मेयर सुरेंद्र चौहान, डिप्टी मेयर उमा कौशल समेत कई कांग्रेसी पार्षद सदन में जाने लगे तो कर्मचारियों ने नारेबाजी तेज कर दी।
मेयर पर धोखा देने के आरोप लगाए। इस पर मेयर भड़क गए। उन्होंने कहा कि जब मांगें मान ली हैं तो प्रदर्शन क्यों, सदन की गरिमा भंग मत करो। काफी देर तक तीखी नोकझोंक चलती रही।
सीटू के राज्याध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, गदर फ्रंट के नेता रवि कुमार समेत सैहब कर्मचारियों ने कहा कि कर्मचारियों की बहाली के निर्देश देकर मेयर अब मुकर रहे हैं। यह तानाशाही है। मेयर सुरेंद्र चौहान सदन की ओर जाने लगे तो प्रदर्शनकारी भी जबरन सदन में जाने लगे। स्थिति पुलिस के नियंत्रण से बाहर हो गई। सदन के भीतर पहुंचकर नारेबाजी भी शुरू हो गई। इस हंगामे के बीच मेयर ने 2:40 बजे सदन का कार्रवाई शुरू कर दी। सदन में एक ओर नारेबाजी तो दूसरी ओर कार्रवाई चलती रही। 2:42 बजे क्यूआरटी पहुंची और प्रदर्शन कर रहे लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद सीटीओ चौक पर शाम 4:00 बजे तक प्रदर्शन चलता रहा। सदन में मेयर और पार्षदों ने इस घटना पर एतराज जताया। पार्षद वीरेंद्र ठाकुर और बिट्टू कुमार ने कर्मचारियों की सेवाएं बहाल कर विवाद खत्म करने की मांग की। उधर पुलिस ने वीडियोग्राफी कर इस मामले में जांच शुरू कर दी है।
सदन में ऐसी घटना शर्मनाक
सदन में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि आते हैं। जनता की समस्याओं पर फैसले होते हैं लेकिन सीटू और सैहब कर्मचारियों ने सदन की गरिमा तक नहीं रखी। कर्मचारियों की मांगें पूरी की जा रही है। सेवा बहाली की प्रक्रिया भी चल रही है। फिर भी ऐसा विरोध शर्मनाक है।- सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला
समझौते के बाद भी सेवा बहाल नहीं मेयर ने बैठक में कहा था कि सभी बर्खास्त कर्मचारियों की सेवाएं बहाल होंगी लेकिन एक हफ्ते बाद भी कोई फैसला नहीं लिया। कर्मचारियों को धोखा दिया है। सेवा बहाली की फाइल लटकाई जा रही है। -जसवंत सिंह, अध्यक्ष सैहब कर्मचारी यूनियन
सदन में नहीं जा सकते आम आदमी
विधानसभा की तर्ज पर नगर निगम सदन की भी गरिमा है। यहां जन प्रतिनिधियों और उनके सवालों के जवाब देने आए अधिकारियों के अलावा अन्य व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। ऐसा करने पर आपराधिक केस दर्ज हो सकता है। इस मामले में भी अब कानूनी कार्रवाई तय है।
गलती न मानने पर बर्खास्त कर्मियों के सेवा बहाली के जवाब नामंजूर
सफाई व्यवस्था ठप कर हड़ताल करने के लिए बर्खास्त किए 41 सैहब कर्मचारियों की सेवा बहाली में पेच फंस गया है। नगर निगम इन कर्मचारियों के दिए जवाब से संतुष्ट नहीं है। ऐसे में इन्हें दोबारा जवाब देने को कहा है। निगम प्रशासन के अनुसार एस्मा लागू होने के बावजूद कर्मचारियों ने हड़ताल की थी। अब बर्खास्त होने के बाद कई कर्मचारियों ने जवाब दिया है कि उन्होंने अपनी मांगों को लेकर यह हड़ताल की थी और यह उनका अधिकार है। जवाब में कहीं भी कर्मचारियों ने गलती नहीं मानी है। इस आधार पर उनकी सेवाएं बहाल होना मुश्किल है। कर्मचारियों ने अब दोबारा से अपने जवाब तैयार कर नगर निगम को सौंप दिए हैं।
निगम आयुक्त भूपेंद्र अत्री ने कहा कि यह जवाब देखने के बाद अब फैसला लिया जाएगा। सैहब सोसायटी कर्मचारी यूनियन और सीटू का कहना है कि बर्खास्त कर्मचारियों की सेवाएं बहाल की जानी चाहिए। इसी मांग को लेकर सीटीओ चौक पर कर्मचारियों का प्रदर्शन भी जारी रहेगा। शहर में सफाई व्यवस्था आउटसोर्स करने के टेंडर को भी सदन ने मंजूरी दी है। हालांकि, अभी कुछेक वार्डाें में ही सफाई का काम ठेके पर दिया जाएगा। आयुक्त ने कहा कि अभी किसी भी सैहब कर्मी को नहीं हटाया जाएगा। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि घरों से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारी की तनख्वाह बढ़ाई जाएगी।