राज्य का सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2017-18 में 1,36,542 करोड़ था, जिसके 2018-19 में 1,51,835 करोड़ होने का अनुमान है। इसमें कृषि क्षेत्र का योगदान 1 फीसदी कम हो गया है। वर्ष 2016-17 मेें खाद्यानों का उत्पादन 15.63 लाख मीट्रिक टन की तुलना में वर्ष 2017-18 में 15.31 लाख टन हुआ।
वर्ष 2018-19 में 16.69 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि क्षे़त्र का भाग लगभग 9 प्रतिशत है। 2018-19 में राज्य की अर्थव्यवस्था सुधरी है। 1 प्रतिशत विकास दर बढ़ने का अनुमान है।
हिमाचल में जमा उधार अनुपात 30 सितंबर, 2018 को 47.46 प्रतिशत था। राष्ट्रीय प्रति शाखा जनसंख्या औसत 11,000 की तुलना में राज्य की 3,209 है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में नवंबर, 2018 तक 4,230.42 करोड़ का राजस्व जुटाया गया।
2017 से 2018 में अखिल भारतीय थोक मूल्य सूचकांकों में मुद्रास्फीति दर 4.64 प्रतिशत दर्शाई गई। राष्ट्रीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में 2.31 प्रतिशत की वृद्धि रही।
हिमाचल के रोजगार कार्यालयों में दिसंबर, 2018 तक 8,49,981 बेरोजगार पंजीकृत किए गए हैं। गृहिणी सुविधा योजना के तहत सूबे में नवंबर, 2018 तक 32,134 नए रसोई गैस कनेक्शन दिए। उज्ज्वला योजना के अंतर्गत 85,421 रसोई गैस कनेक्शन दिए।
25 करोड़ के बजट प्रावधान से प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना आरंभ की। दूध खरीद मूल्य में 1.00 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी और 42,650 परिवार इससे लाभान्वित हुए। राज्य के 5,012 मछुआरे प्रत्यक्ष रूप से मत्स्य पालन से आजीविका चला रहे हैं। मार्च, 2018 तक 37,265 हैंडपंप स्थापित लगे।
फल उत्पादन में आई कमी
प्रदेश में वर्ष 2018-19 में फल उत्पादन 4.06 लाख टन हुआ, जो वर्ष 2017-18 में 5.65 लाख टन आंका गया। वर्ष, 2018-19 में 3.60 लाख टन सेब का उत्पादन हुआ है। वर्ष 2017-18 में सेब का उत्पादन 4.47 लाख टन था। प्रदेश में कुल फल उत्पादन में से सेब का भाग लगभग 79 प्रतिशत है।
हिमाचल में 49058 लघु और 522 मध्यम व बडे़ उद्योग हैं। सूबे में 27436 मेगावाट विद्युत क्षमता में से 10547 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यह 38.44 फीसदी है। दिसंबर 2018 तक 37913 किलोमीटर सड़कें बनीं और 10308 गांव जोडे़ गए।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सदन में प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 में उल्लेख किया है कि एचआरटीसी के बेड़े मेें 3078 बसेें, 25 इलेक्ट्रिक बसें, 21 टैक्सियां और 50 इलेक्ट्रिक टैक्सियां हैं। ये वाहन 2869 मार्गों पर प्रतिदिन 6.35 लाख किमी दूरी तय कर रहे हैं। 2018 में 164.50 लाख पर्यटक हिमाचल आए।
प्रदेश में 10714 प्राथमिक, 2102 माध्यमिक, 929 उच्च पाठशालाएं, 1841 वरिष्ठ माध्यमिक और 138 महाविद्यालय हैं। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और बीपीएल परिवारोें के बच्चों को मुफ्त पाठ्य पुस्तकें दी जा रही हैं।
विवि स्तर तक लड़कियों को मुुुफ्त शिक्षा दी जा रही हैं। इनमें व्यावसायिक पाठ्यक्रम भी शामिल हैं। सर्व शिक्षा अभियान से गुणवत्ता में सुधार को हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
शैक्षिक रूप से पिछड़े खंडों में कन्या छात्रावासों का निर्माण किया है। 10वीं और 12वीं के 8800 मेधावियों को नेटबुक्स, लैपटॉप और 1 जीबी डाटा कार्ड दे रहे हैं। तकनीकी शिक्षा में डिग्री स्तर में 3430, बी फार्मेसी में 900, डिप्लोमा स्तर में 6500 और आईटीआई-आईटीसी में 49319 विद्यार्थियों की
प्रवेश क्षमता है। मुख्यमंत्री स्वावलंबन योजना आरंभ की गई। मुख्यमंत्री स्टार्ट-अप योजना से 8 इंक्यूबेशन सेंटर में 27 स्टार्ट-अप शुरू किए गए। तीन होनहार उद्यमियों को पुरस्कार दिए गए।
प्रदेश में 89 चिकित्सालय, 91 सीएचसी, 580 पीएचसी, 16 ईएसआई डिस्पेंसरी और 2085 उप केंद्रों से स्वास्थ्य सुविधा दी जा रही है। निजी संस्थाएं भी सेवाएं दे रही हैं।
वर्ष 2018-19 में 2 क्षेत्रीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों, 31 चिकित्सालयों और 1178 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्रों, 3 यूनानी स्वास्थ्य केंद्र और 14 होम्योपैथिक स्वास्थ्य केंद्रों से आयुर्वेदिक उपचार की सुविधा दी जा रही है।
केंद्र सरकार ने 3 फरवरी, 2019 को बाइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सीन के साथ निर्धारित किया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में 95 स्वास्थ्य संस्थानों से 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं दी हैं। हिमकेयर योजना से 5 लाख तक के निशुल्क इलाज की सुविधा दी जा रही है।
मुख्यमंत्री निरोग योजना आरंभ की। 130 वेलनेस केंद्र बनेंगे। एक राज्य चिकित्सालय, एक आंचलिक चिकित्सालय, 408 पशु चिकित्सालय, 1766 पशु औषधालय 30 केंद्रीय पशु औषधालय, 9 पॉलीक्लीनिक और 6 पशु चिकित्सा चौकियां हैं।
सामाजिक सुरक्षा योजना में 60 वर्ष से ऊपर लेकिन 70 वर्ष से कम व्यक्तियों जिनकी वार्षिक आय 35 हजार से कम है को 750 प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। 70 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को 1300 प्रतिमाह पेंशन बिना किसी आय मापदंड के दी जा रही है।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना से बेसहारा लड़कियों के अभिभावकों को 40000 विवाह अनुदान दिया जा रहा हैै। कुल 1111 लाभार्थियों को लाभ पहुंचाया गया। बेटी है अनमोल योजना से 16000 बालिकाओं को लाभ दिया।
सक्षम गुडि़या बोर्ड बनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में 5400 महिला स्वयं सहायता समूहों को सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी। मातृ शक्ति बीमा योजना के अधीन 134 लाख की वित्तीय सहायता 91 परिवारों को दी है। 2018 में 73.15 लाखआधार बनाए।
महिला सुरक्षा और महिलाओं के प्रति हिंसक घटनाओं पर अंकुश लगाने को शक्तिएप शुरू किया। वृद्धावस्था पेंशन आयु सीमा 70 वर्ष की गई। 70 साल से अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों को धार्मिक स्थलों के दर्शन हेतु देवभूमि दर्शन योजना शुरू की गई।