इफको का इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर।
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हिमाचल प्रदेश में खेतों व बगीचों पर ड्रोन से खाद व कीटनाशकों के छिड़काव की प्रक्रिया अब धरातल पर उतरने लगी है। इस कड़ी में इफको का प्रदेश में पहले इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर ऊना पहुंच चुका है। इस इलेक्ट्रिक वाहन की मदद से ड्रोन को एक से दूसरे स्थान तक लेकर जाना आसान होगा और साथ में जरूरी खाद व कीटनाशकों को रखने के लिए रैक भी बनाए गए हैं। वाहन में ड्रोन को चार्ज करने की व्यवस्था भी रहेगी। जानकारी के अनुसार इफको की ओर से जारी इलेक्ट्रिक थ्री व्हीलर की कीमत करीब 4.5 लाख रुपये है। लेकिन यह चयनित लोगों को निशुल्क जारी होगा।
इस वाहन में पानी रखने के लिए 100 लीटर की टंकी बनाई गई है। जबकि ड्रोन में 10 लीटर की टंकी रहेगी। ऐसे में ड्रोन की पानी की आवश्यकता को इलेक्ट्रिक वाहन की मदद से 10 बार पूरा किया जा सकेगा। सुदूर क्षेत्रों में जाने पर ड्रोन संचालकों को पानी की कमी से परेशानी नहीं होगी। इसके अलावा वाहन में एक जनरेटर की सुविधा भी है। दरअसल एक ड्रोन के साथ इफको तीन अतिरिक्त बैटरी देगा। एक बैटरी की क्षमता 30 मिनट तक रहेगी। ऐसे में अन्य तीन बैटरी को जनरेटर की मदद से चार्ज रखा जाएगा। ताकि एक के खत्म होने पर दूसरी का इस्तेमाल संभव हो। वाहन में खाद, कीटनाशक व अन्य सामान रखने के लिए रैक भी बनाए गए हैं। वहीं ड्रोन को रखने के लिए भी बेल्ट लगाई गई हैं।
बता दें कि जिला में दो स्थानों पर इलेक्ट्रिक वाहन व ड्रोन की खेप जारी की जाएगी। इसमें पहले चरूड़ू केंद्र के लिए पहले वाहन और ड्रोन जारी किया जा रहा है। उसके बाद हरोली के नंगल खुर्द के चयनित व्यक्ति को ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहन जारी किए जाएंगे। चयनित दोनों लोगों का जल्द शिमला में साक्षात्कार होगा। जिसके बाद उन्हें नोएडा में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा। ट्रेनिंग के बाद ड्रोन भी जारी किए जाएंगे। खेतों में छिड़काव के दौरान एक कनाल के 30 रुपये तक का शुल्क लिया जाएगा। 10 कनाल जमीन पर 15 मिनट के भीतर छिड़काव संभव होगा। ऐसे में यह किसानों का जेब खर्च बचाएगा और ड्रोन उड़ाने वालों को रोजगार भी मिलेगा।
जिला में ड्रोन से खाद व कीटनाशकों के छिड़काव के रखरखाव के लिए इलेक्ट्रिक वाहन आ चुका है। दिसंबर माह की शुरुआत में ड्रोन भी आएगा। जल्द खेतों पर ड्रोन उड़ान भरते नजर आएंगे। जिससे किसानों का पैसा भी बचेगा और रोजगार भी पैदा होगा। आने वाला समय तरल खादों का है। इससे पर्यावरण सुरक्षित होगा और फसलों की पैदावार भी बढ़ेगी।-माशूक अहमद, क्षेत्रीय प्रबंधक, इफको ऊना।