हमेशा घाटे का रोना रोने वाले हिमाचल पथ परिवहन निगम की बदइंतजामी की पोल कैग रिपोर्ट में खुली है। एचआरटीसी की बसें जरूरत से ज्यादा तेल पी गईं। इससे निगम को करीब 240 करोड़ का चूना लगा। शुक्रवार को प्रदेश विधानसभा के पटल पर सीएम वीरभद्र सिंह ने कैग रिपोर्ट पेश की। इसमें प्रदेश में सरकारी विभागों, निगमों, बोर्डों आदि की अव्यवस्था भी सामने आई है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों के कार्यकाल में कई तरह की अनियमितताएं उजागर हुई हैं। कैग रिपोर्ट के अनुसार एचआरटीसी ने 2011-16 के बीच अखिल भारतीय औसत की तुलना में 498.38 लाख के ईंधन की अधिक खपत की। इससे 240.02 करोड़ का अतिरिक्त व्यय हुआ। कैग रिपोर्ट और भी कई खुलासे हैं।
इसके मुताबिक हिमाचल सरकार के आबकारी एवं कराधान विभाग में अधिकारियों और मोटर वाहन पंजीकरण अधिकारियों में समन्वय नहीं बनने से सभी वाणिज्यिक वाहनों को प्रदेश यात्री और माल कर अधिनियम के तहत पंजीकृत करने को सुनिश्चित न करने से 84.90 करोड़ की उगाही नहीं की जा सकी।
ये अनियमितताएं भी हुईं उजागर
हिमाचल प्रदेश के प्रधान महालेखाकार राम मोहन जौहरी प्रेस वार्ता करते हुए।
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भूमि की लीज डीड का इस्तेमाल नहीं करवा पाने और लीज डीड रद्द नहीं करवा पाने पर सरकार को 101.80 करोड़ का नुकसान हुआ। टोल बैरियरों पर लेसीज से 51.40 करोड़ की लीज मनी की उगाही नहीं की जा सकी। आबकारी एवं कराधान विभाग की ओर से बिक्री केंद्रों को खोलने के लिए लाइसेंस फीस की अल्प वसूली की जा सकी। 29 लाइसेंसधारियों से 8.59 करोड़ की कम वसूली हुई।
राजस्व विभाग में गलत बाजार दर को अपनाने से 79 लाख के स्टांप शुल्क और पंजीकरण फीस की अल्प वसूली की जा सकी। परिवहन विभाग में 2012-13 से 2014-15 के लिए 11,088 वाहनों के लिए 4.09 करोड़ के सांकेतिक कर की न तो मांग की गई और न ही इन वाहन मालिकों ने इसका भुगतान किया।
एचआरटीसी, निजी स्टेज कैरिजों और अन्य राज्यों के स्टेज कैरिजों से 1.53 करोड़ वसूले गए। वन निगम में गलत दरों को लागू करने से 8.30 करोड़ की रॉयल्टी कम वसूली गई। अंतरराज्यीय बस टर्मिनल दिल्ली और पार्किंग स्थल जगतपुर के बीच डेड किलोमीटरों को लिखे जाने में हुई अनियमितताओं से मार्च 2016 से पहले के पांच साल की अवधि में 2.14 करोड़ का घाटा हुआ।