निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य मृतक सरकारी कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक राहत प्रदान करना है, न कि रोजगार का स्थायी अधिकार देना। पत्र में कहा गया है कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का अपवाद है और इसे केवल पात्र आश्रित को ही दिया जा सकता है। इसलिए इस लाभ को किसी अन्य परिवार सदस्य के नाम स्थानांतरित, नामित या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। सरकार के स्पष्टीकरण के अनुसार यदि मूल आवेदक निर्धारित ऊपरी आयु सीमा पार कर लेता है तो उसका दावा स्वतः समाप्त हो जाएगा। ऐसी स्थिति में पुत्र, पुत्री या कोई अन्य आश्रित सदस्य उसकी जगह अनुकंपा नियुक्ति की मांग नहीं कर सकेगा।
निदेशालय ने कहा है कि मूल आवेदक के स्थान पर परिवार के किसी अन्य सदस्य को अवसर देना वस्तुतः एक नया दावा होगा, जबकि वर्तमान अनुकंपा नियुक्ति नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अधिकारियों को चेताया गया है कि इस प्रकार के मामलों को स्वीकार करने से भविष्य में अवांछित मिसालें और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने सभी जिला और उपमंडल स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों का निपटारा करते समय सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाए। साथ ही प्रतिस्थापन अथवा नए दावों से जुड़े मामलों पर नीति के अनुरूप ही निर्णय लिया जाए।