आरोपियों ने कहा कि जांच पूरी होने तक धनराशि को सत्यापन और सुरक्षा के लिए सरकारी निगरानी खाते में जमा कराना होगा, जिसके बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी। डर और भ्रम में आकर सेवानिवृत्त अधिकारी ने तीन नवंबर 2025 से दो जनवरी 2026 के बीच करीब 5 लाख से 28 लाख रुपये तक की कई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कीं। इस दौरान कुल 1.14 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में भेज दिए। बाद में न तो रकम वापस मिली और न ही कथित अधिकारियों से संपर्क हो सका, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। पीड़ित की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस थाना मंडी में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
डिजिटल अरेस्ट या किसी जांच एजेंसी के नाम पर आने वाले ऐसे कॉल से न घबराएं। किसी भी अनजान खाते में पैसा ट्रांसफर न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या निकटतम साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। -ज्ञानेश्वर सिंह, एडीजीपी सीआईडी