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Himachal Weather: जाहलमा नाले के पास सड़क बहाल, मनाली-लेह हाईवे फिर खुला; मौसम विभाग ने जारी किया ऑरेंज अलर्ट

Tue, 30 Jun 2026 10:00 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला/धर्मशाला।

सार

हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर तेज होने के बीच लाहौल के जाहलमा नाले में जलस्तर बढ़ने से एसकेटीटी सड़क प्रभावित हो गई, जिससे 14 पंचायतों और पांगी क्षेत्र का सड़क संपर्क बाधित हो गया। कई अन्य जिलों में भी बारिश हुई। मौसम विभाग ने दो और तीन जुलाई के लिए भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मानसून के आगमन की संभावना के बीच प्रशासन और दूरसंचार विभाग ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। पढ़ें पूरी खबर...
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जाहलमा नाले के पास सड़क बहाल - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में बदले मौसम के बीच सोमवार को लाहौल घाटी में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ के तेजी से पिघलने के कारण जाहलमा नाले में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे एसकेटीटी सड़क अवरुद्ध हो गई। सड़क बंद होने से लाहौल की 14 पंचायतों और चंबा के दुर्गम पांगी क्षेत्र का शेष प्रदेश से सड़क संपर्क कट गया है। प्रदेश के कई हिस्सों में सोमवार को बारिश हुई, जबकि कुछ क्षेत्रों में गर्मी और उमस का असर बना रहा।

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रात को बीआरओ ने यातायात किया बहाल: वहीं, ,लाहौल-स्पीति जिले में जाहलमा नाले के पास प्रभावित हुए मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात एक बार फिर बहाल कर दिया गया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने देर रात मरम्मत और बहाली का कार्य पूरा करने के बाद आधी रात से वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी।
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राजधानी शिमला में सोमवार को भी हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। मंडी के जोगिंद्रनगर में दोपहर बाद झमाझम बारिश हुई, जिससे लंबे समय से वर्षा का इंतजार कर रहे किसानों को राहत मिली। बारिश के बाद धान की रोपाई कार्य में तेजी आने की उम्मीद है। रविवार देर रात तीन बजे शिमला में एक घंटे तक जोरदार बारिश के साथ अंधड़ चला। ऊना जिले में सुबह पांच बजे के करीब मौसम ने अचानक करवट बदली और जिलेभर में बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब बने रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। दो और तीन जुलाई को भारी बारिश की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसी दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के हिमाचल में प्रवेश करने के भी प्रबल आसार हैं। 

हमीरपुर में सोमवार सुबह बारिश हुई। नादौन के मुख्य बाजार में भी दुकानों में पानी घुसा। जिला मुख्यालय धर्मशाला में सोमवार को दोपहर एक बजे बारिश का दौर शुरू हुआ। इसके बाद शाम करीब साढ़े पांच फिर रूक-रूक कर हल्की बारिश हुई। 

ऊना प्रदेश में सबसे गर्म, 36.0 डिग्री रहा दिन का तापमान: बरठीं 33.6, नेरी 33.4, नाहन 33.4, धर्मशाला 33.0, चंबा 32.3, सोलन 29.6, मनाली 29.4, शिमला 23.6, ऊना 36.0, भुंतर 35.8, मंडी 34.8 और कांगड़ा 33.7 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया। 

आपदा में भी नहीं टूटेगा संपर्क दूरसंचार विभाग की बड़ी तैयारी: मानसून सीजन के दौरान भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी आपदाओं के बीच लोगों तक संचार सेवाएं निर्बाध पहुंचती रहें, इसके लिए दूरसंचार विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। पिछले वर्षों में आई आपदाओं से मिले अनुभवों को आधार बनाकर विभाग ने दूरसंचार नेटवर्क को अधिक मजबूत और आपदा-रोधी बनाने की दिशा में काम तेज कर दिया है।

दूरसंचार विभाग के हिमाचल प्रदेश लाइसेंस सेवा क्षेत्र के अपर महानिदेशक (दूरसंचार) वीरेंद्र कुमार ने बताया कि पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक चुनौतियों को देखते हुए आपातकालीन परिस्थितियों में संचार सेवाओं का सुचारु संचालन विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।  विभाग ने राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों तथा विभिन्न दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ समन्वय स्थापित कर तैयारियों की समीक्षा शुरू कर दी है। दूरसंचार कंपनियों ने क्षतिग्रस्त ऑप्टिकल फाइबर केबल, पोल और अन्य ढांचागत संसाधनों को बदलने के साथ-साथ वैकल्पिक फाइबर मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं।

इंट्रा-सर्किल रोमिंग बनेगी बड़ी ताकत... विभाग का विशेष फोकस इंट्रा-सर्किल रोमिंग (आईसीआर) व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय रखने पर है। किसी क्षेत्र में किसी एक कंपनी का नेटवर्क ठप हो जाता है तो उपभोक्ता दूसरे सेवा प्रदाता के नेटवर्क का उपयोग कर सकेंगे। इससे आपदा की स्थिति में भी मोबाइल संचार पूरी तरह बंद नहीं होगा। तैयारियों की प्रभावशीलता जांचने के लिए हाल ही में विभागीय अधिकारियों और टेलीकॉम कंपनियों के प्रतिनिधियों ने एसडीएमए के साथ बैठकों, टेबल टॉप अभ्यासों और मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया। 
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जाहलमा नाले का वैकल्पिक मार्ग बहा, किसानों को पीठ पर ढोनी पड़ी मटर की फसल: जाहलमा नाले पर बनाया गया वैकल्पिक मार्ग बह जाने से क्षेत्र के किसानों और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन दिनों उदयपुर क्षेत्र में मटर की तुड़ाई का सीजन चल रहा है, लेकिन सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण किसानों को अपनी उपज मंडियों तक पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार सुबह किसानों ने मजदूरों की मदद से मटर की बोरियों को पीठ पर उठाकर नाले के दूसरी ओर पहुंचाया। इससे न केवल परिवहन में परेशानी हुई, बल्कि किसानों का समय और खर्च भी बढ़ गया। घाटी में ग्लेशियरों के लगातार पिघलने और नदी-नालों के उफान पर होने से कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित है। यह समस्या पिछले महीने जाहलमा पुल टूटने के बाद से बनी हुई है। पुल टूटने के बाद बीआरओ ने आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्ग तैयार किया था, लेकिन सोमवार को नाले का जलस्तर बढ़ने से यह मार्ग भी बह गया, जिससे एक बार फिर संपर्क बाधित हो गया है।

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