नियमों के अनुसार पंचायत समिति की शक्तियां संबंधित ब्लॉक के बीडीओ और जिला परिषद की शक्तियां जिला पंचायत अधिकारी अथवा एडीसी को सौंपी जा सकती हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज अधिनियम 1994 की धारा 140 की उपधारा (3) के तहत चुनाव पूरे होने तक पंचायतों का दायित्व या तो तीन सदस्यीय कमेटी को सौंपा जा सकता है या फिर पंचायत सचिव को जिम्मेदारी दी जा सकती है।
इन दोनों व्यवस्थाओं के जरिये प्रदेश की 3577 पंचायतों में प्रशासनिक कामकाज सुचारू रूप से चलाया जा सकता है। हिमाचल प्रदेश में कोविड काल के दौरान लाहौल-स्पीति जिले के लाहौल ब्लॉक और चंबा जिले के पांगी ब्लॉक में पंचायत चुनाव देरी से होने पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। मुख्य अध्यापक की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी में पंचायत सचिव को सदस्य सचिव और ग्राम रोजगार सेवक को सदस्य बनाया गया था। वर्तमान में प्रदेश में 3577 ग्राम पंचायतें, 92 पंचायत समितियां और 249 जिला परिषद वार्ड हैं। प्रदेश सरकार ने मानसून के दौरान आई प्राकृतिक आपदा के चलते डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू कर रखा है।
उधर, राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत पुनर्सीमांकन की प्रक्रिया 28 फरवरी से पहले पूरी होनी चाहिए और इसी अवधि में आरक्षण रोस्टर भी जारी किया जाए। पंचायती राज विभाग को 817 नई पंचायतों के गठन के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। सरकार के निर्देशों के अनुसार तीन हजार से अधिक जनसंख्या वाली पंचायतों के विभाजन और नई पंचायत के लिए न्यूनतम 1500 जनसंख्या का मानक तय किया गया। इन मापदंडों के आधार पर 32 पंचायतों का प्रस्ताव तैयार किया गया है।