हिमाचल प्रदेश के अधिकारी आरटीआई एक्ट को हल्के में ले रहे हैं। इस पर राज्य सूचना आयोग ने तल्खी दिखाई है।
आयोग ने ऐसे ही एक मामले में हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड के इलेक्ट्रिकल डिविजन सरकाघाट के अधिशासी अभियंता को कहा है कि आरटीआई आवेदन पर गंभीरता से विचार नहीं करने के मामले की वे समीक्षा करें, जिससे भविष्य में ऐसी स्थिति पैदा न हो।
यह फैसला राज्य मुख्य सूचना आयुक्त नरेंद्र चौहान की आरटीआई अदालत ने सुनाया है। आयोग ने प्रबोध चंद्र बनाम एक्सईएन इलेक्ट्रिकल डिविजन सरकाघाट आरटीआई अपील की सुनवाई की।
आवेदक ने इस संबंध में बिजली बोर्ड में भांबला के एसडीओ से आरटीआई अधिनियम के तहत सूचना मांगी, मगर समय पर नहीं मिली। आरोप लगाया कि उन्हें सूचना लेने की प्रक्रिया के दौरान परेशान भी किया गया।
यह सूचना बिजली मीटरों के कनेक्शन देने और बाद मेें इन्हें काट लेने, दोबारा से देने से संबंधित थी। आयोग के सामने आवेदक ने दलील दी है कि उनकी आरटीआई दरख्वास्त पर कार्रवाई करने से पहले चार से पांच महीने की अवधि के बीच जानबूझकर शोषित किया गया।
आयोग ने पाया कि आवेदक की यह दलील सही लगती है। ऐसे में जन सूचना अधिकारी यानी संबंधित एसडीओ पर पेनल्टी लगाने केे लिए एकदम वाजिब मामला है। इस बारे में जन सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस भी दिया गया कि क्यों न उन पर 1500 रुपये की पेनल्टी लगाई जाए।
आयोग ने 10 फरवरी तक इस कारण बताओ नोटिस पर जवाब तलब किया, जिसे देखने के बाद अंतिम आदेश जारी किए। अंतिम आदेश में अधिशासी अभियंता को आरटीआई के तमाम लंबित आवेदनों की गंभीरता से समीक्षा करने को कहा गया।