पहले ये अधीक्षक अपनी पुरानी सीट को बचाने के लिए जुगाड़बाजी में लगे रहे लेकिन जब कुछ नहीं हुआ तो अपने स्तर पर ही पुरानी सीटों पर बैठ गए। तर्क यह दिया गया कि नए विभाग की सीट पर तैनात होने से कामकाज प्रभावित हो सकता है।
सरकार को इसकी जानकारी नहीं है, लेकिन निचले स्तर के अफसरों के साथ मिलकर तबादले के आदेश नहीं माने गए हैं। उल्लेखनीय है कि ये अधीक्षक 10 से 15 सालों से एक ही सीट पर बैठे हैं। लिपिक बनने पर भी उसी ब्रांच में थे। अब अधीक्षक बने तो उसी ब्रांच में सेवाएं दे रहे हैं।