पोर्टल में प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्यों और ग्राम सभा सदस्यों की उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज होगी। बैठक के लिए जरूरी कोरम की स्थिति भी सिस्टम में निर्धारित की जा सकेगी। कार्यवाही तैयार होने के बाद ई-हस्ताक्षर की सुविधा रहेगी। इससे भौतिक रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी। मंत्री ने बताया कि पोर्टल पर पंचायत से राज्य स्तर तक के अधिकारी जुड़ सकेंगे। हिम एक्सेस के माध्यम से लॉगिन की सुविधा होगी, जिससे अलग-अलग पोर्टल पर जाने की जरूरत कम होगी। इसे पंचायती राज विभाग की वेबसाइट से भी जोड़ा जाएगा। इसके बाद आम नागरिक भी किसी पंचायत की बैठक की कार्यवाही ऑनलाइन देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश का करीब 90 फीसदी क्षेत्र ग्रामीण है। ऐसे में तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों को केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले बजट का नियमानुसार प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। मंत्री ने पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया।
पंचायतों की विकास योजनाएं अपलोड करने की समय सीमा बढ़ी
हिमाचल की जिला पंचायतों और पंचायत समितियों को वित्त वर्ष 2026-27 की विकास योजनाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करने के लिए पांच दिन की अतिरिक्त मोहलत मिल गई है। पंचायती राज विभाग के अनुसार केंद्र के पंचायती राज मंत्रालय ने जिला पंचायत विकास योजनाओं (डीपीडीपी) और ब्लॉक पंचायत विकास योजनाओं को पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी है। विभाग ने इस संबंध में सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र की सभी पात्र जिला परिषदों और पंचायत समितियों की विकास योजनाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत तैयार करने के बाद तय समय सीमा में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करवानी होंगी। पंचायती राज विभाग ने मामले को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।