वह दूसरी कक्षा से ही पेंटिंग कर रहे हैं। वासिक खाली बोतलें, डिब्बों, बल्ब, टायरों, ऊन, अंडे की बाहरी परत, कंकरों, रस्सी पर रंगों का उपयोग कर सजावटी व कुर्सी, टेबल जैसे उपयोगी सामान बनाते हैं। वह दिल्ली में कई प्रदर्शनी भी लगा चुके हैं। अपना यही हुनर वह अब आस्था स्कूल के दिव्यांग बच्चों को भी सिखा रहे हैं। उनका सपना इन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
यही कारण है कि वासिक ने पहले उनको बेकार की वस्तुओं से उपयोगी सजावटी सामान बनाना सिखाया, अब उन्हें कपड़े और कागज पर की जाने वाली चित्रकारी के गुर सिखा रहे हैं। दो दिन पहले आस्था स्कूल में लगी दिव्यांगों की कला प्रदर्शनी में भी ऐसे ही सामान को रखा गया, जिसे लोगों ने खूब पसंद किया।