सतलुज नदी पर बनने वाली लूहरी जल विद्युत परियोजना में बिजली की प्रति यूनिट टैरिफ और जमीन की लागत अड़ंगा लगा सकती है। केंद्र सरकार की नई पॉलिसी से लूहरी परियोजना की मुश्किल बढ़ सकती है। अगर पॉलिसी की शर्तों को पूरा नहीं किया गया तो परियोजना को मंजूरी नहीं मिल सकेगी। तीन चरणों में बनने वाली लूहरी परियोजना के लिए सब सही रहा तो प्रथम चरण की परियोजना का निर्माण एक वर्ष में शुरू कर दिया जाएगा और पांच वर्ष में इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
केंद्र सरकार ने नई हाइड्रो पॉलिसी बनाई है। लूहरी परियोजना को आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं कि यदि साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट की दर से टैरिफ आता है तभी इस परियोजना निर्माण को मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा परियोजना निर्माण के लिए खरीदी जाने वाली जमीन की लागत भी परियोजना निर्माण के लिए अड़ंगा खड़ा कर सकती है। हालांकि इसको लेकर परियोजना को प्रदेश सरकार से छूट दी गई है और सरकार ने और भी छूट देने का आश्वासन दिया है। परियोजना निर्माण के लिए करीब 70 प्रतिशत लोग मान चुके हैं।
सतलुज जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा ने बताया कि पहले लूहरी परियोजना एक चरण में बननी थी, लेकिन अब इसे तीन चरणों में विभाजित किया गया है। इसमें किसी भी टनल का निर्माण नहीं किया जाएगा। परियोजना में तीन बांध बनेंगे और इसके साथ पावर हाउस का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि साढ़े चार रुपये प्रति यूनिट की दर से टैरिफ आता है, तभी इस परियोजना को मंजूरी दी जाएगी। भारत सरकार ने नई हाइड्रो पॉलिसी बनाई है। उन्होंने विश्वास जताया कि टैरिफ 4.50 रुपये आएगा।
लूहरी जल विद्युत परियोजना का निर्माण तीन चरणों में होना है। स्टेज-1 नीरथ के पास बननी प्रस्तावित है। जो 210 मेगावाट की होगी। इसके अलावा स्टेज-2 नांच के पास बननी है, जो 172 मेगावाट की है। वहीं सुन्नी के पास तीसरे चरण की परियोजना बनना प्रस्तावित है, जो 370 मेगावाट की होगी। इस परियोजना के निर्माण में शिमला, कुल्लू और मंडी जिले की कुल 21 पंचायतें प्रभावितों होंगी।