उन्होंने कहा कि फील्ड स्टाफ की तैनाती न होने के कारण प्रोजेक्ट के काम फील्ड में तेजी से नहीं हो रहे थे। जूनियर इंजीनियर हिप्पा में 10 से 12 दिसंबर तक प्रशिक्षण हासिल करेंगे। इसके तुरंत बाद उन्हें क्लस्टरों में तैनात किया जाएगा। इसके बाद से क्लस्टरों में सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन स्कीमें तैयार की जाएंगी। प्रोजेक्ट के तहत करीब 302 क्लस्टर तैयार किए गए हैं।
एक क्लस्टर में 10 से 30 हेक्टेयर जमीन शामिल की गई है। मल्होत्रा ने बताया कि प्रोजेक्ट में विश्व बैंक ने क्लस्टर बनाकर कार्य करने की शर्त रखी है। इन क्लस्टरों से जुड़े बागवानों को सामूहिक रूप में लाभ पहुंचाया जाएगा। बागवानों को एक साल में सेब सहित विभिन्न फलों के पौधे उपलब्ध कराए जाने हैं।