प्रदेश उच्चतर शिक्षा परिषद के अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर माथापच्ची शुरू हो गई है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और विद्यार्थी परिषद से जुड़े तीन शिक्षाविदें के नाम अध्यक्ष पद की दौड़ में बताए जा रहे हैं। किसकी ताजपोशी होगी, इसका अंतिम फैसला मुख्यमंत्री लेंगे। शिक्षा विभाग में इस मामले को लेकर आजकल काफी गहमागहमी चल रही है।
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में परिषद् के गठन का बिल पास हुआ है। शिक्षा में गुणवत्ता लाने वाले इस बिल को राज्यपाल से मंजूरी मिलने का इंतजार है। राज्यपाल से मंजूरी मिलते ही अध्यक्ष के नाम की घोषणा हो जाएगी। बीते दिनों मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की इस बाबत विस्तृत चर्चा भी हुई है।
परिषद के अध्यक्ष का कार्यकाल पांच वर्ष रहेगा। अगर अध्यक्ष का आचरण और कार्य संतोषजनक नहीं रहता है तो सरकार पांच साल से पहले भी अध्यक्ष को हटा भी सकती है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) मेें उच्च शिक्षा में गुणात्मकता लाने के लिए परिषद का गठन किया जा रहा है।
प्रदेश में रूसा के क्रियान्वयन को लेकर रणनीति और योजना तैयार करने, परीक्षा प्रणाली में सुधार लाने, पाठ्यक्रम को समकालीन बनाने, मूल्यांकन और निगरानी करने, शैक्षणिक सुविधाएं गुणवत्तापूर्ण तरीके से मुहैया करवाने, दिशा निर्देश और सलाह देने, रूसा के तहत फंडिंग कार्य करने, नए संस्थानों और कॉलेजों की स्थापना पर सुझाव देने और संस्थानों की मान्यता की प्रक्रियाओं को सुधारने का काम परिषद करेगी।
उच्च शिक्षा के अनुसंधान अध्ययन, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, तकनीकी विश्वविद्यालय से संबंधित कालेज इसके दायरे में रहेंगे। नौणी विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय और वेटेनरी कॉलेज परिषद के दायरे से बाहर रहेंगे। परिषद का मुख्यालय शिमला में होगा।
यह भी होंगे परिषद में शामिल
प्रदेश सरकार के सचिव ( शिक्षा) उच्चतर शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और राज्य परियोजना अधिकारी रूसा इसके सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा सदस्यों में सूबे के दो सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलपति, केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति, दो निजी विवि के कुलपति, प्रदेश सरकार के सचिव (वित्त) या उनका कोई प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, सचिव (तकनीकी शिक्षा) या उनका कोई प्रतिनिधि, जो संयुक्त सचिव के पद से नीचे का न हो, निदेशक उच्च शिक्षा इसके सदस्य होंगे।
परिषद में गैर सरकारी सदस्य भी होंगे। इसमें कला, विज्ञान, सिविल सोसायटी, प्रौद्योगिकी या कौशल विकास के क्षेत्र से पांच सदस्य, उद्योग से दो विशेषज्ञ, तीन महाविद्यालयों के प्राचार्य, मानव संसाधन मंत्रालय से एक सदस्य और उच्चतर शिक्षा योजना बनाने में अनुभव रखने वाले व्यक्ति को गैर सरकारी सदस्य नियुक्ति किया जाएगा।