प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सीधी भर्ती के लिए न्यायिक अधिकारिओं को योग्य घोषित किये जाने के निर्णय का प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने बहिष्कार किया है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्यों ने नाराजगी जताते हुए वीरवार को अदालती कामकाज से अपने आप को अलग रखा। इस दौरान कोई भी सदस्य किसी भी अदालत में पेश नहीं हुआ।
बार एसोसिएशन ने निर्णय लिया था कि यदि कोई सदस्य अदालत में पेश होता है तो उसे पांच हजार रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न बार एसोसिएशन द्वारा प्रतिवेदन किये जाने के बाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट के इस निर्णय का बहिष्कार किया। बता दें, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 233 (ए) के तहत कोई भी न्यायिक अधिकारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सीधी भर्ती के लिए योग्य नहीं है।
इस पद को केवल सात साल से अधिक वकालत करने वाले वकील से ही भरा जा सकता है। इसी अनुच्छेद के तहत ही प्रदेश हाईकोर्ट ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सीधी भर्ती के लिए भर्ती नियम बनाए जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केवल सात साल या इससे अधिक वकालत वाले वकील ही इस पद के लिए योग्य है।
लेकिन न्यायिक अधिकारी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सीधी भर्ती के लिए योग्य है या नहीं का मामला सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन होने के बावजूद हाईकोर्ट ने न्यायिक अधिकारिओं को भी इस पद के लिए योग्य घोषित कर दिया और उन्हें अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की सीधी भर्ती में भाग लिए जाने की अनुमति प्रदान कर दी।
अब बार एसोसिएशन की एक कमेटी का गठन किया जो हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलेगी और उन्हें इस बारे में अवगत करवाएगी। साथ ही यह भी मुख्य न्यायाधीश से गुजारिश करेगी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है तब तक अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की भर्ती न की जाए।