सरकारी नौकरियों में बाहरी लोगों की घुसपैठ रोकने और हिमाचलियों को तरजीह दिए जाने को लेकर पेच फंस गया है। भर्तियों में गैर हिमाचलियों के नियुक्ति पाने के बाद उठे विवाद पर वीरवार को राज्य सचिवालय में बैठक हुई। लेकिन तमाम अफसरों के बीच चर्चा के बावजूद कोई नतीजा नहीं निकल सका। जिन बिंदुओं को लेकर पेच फंसा है उन पर कार्मिक विभाग से स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है।
अब दोबारा उन मुद्दों पर चर्चा होगी और उसके बाद प्रदेश की अफसरशाही भर्ती नियमों और इंटरव्यू के स्थान पर लिए किये जाने वाले असेसमेंट की प्रक्रिया में बदलाव करेगी। हाल ही में राज्य सचिवालय और फिर शिक्षा विभाग में स्कूल लेक्चरर के पदों पर हो रही भर्ती में बाहरी लोगों को नियुक्ति के लिए रास्ता खुलने पर विवाद हो गया था। राज्य सचिवालय में तृतीय श्रेणी की भर्ती की तो बड़ी संख्या में गैर हिमाचली नियुक्ति के मुद्दे पर विवाद हो गया।
अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया तो जयराम सरकार ने आठ अगस्त की कैबिनेट बैठक में बाहरी लोगों को नौकरी देने के नियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी। नई भर्तियों को संशोधित भर्ती नियमों में ही करने की बात कही गई थी, लेकिन प्रदेश की अफसरशाही ने इसकी अधिसूचना जारी नहीं की। जिसकी वजह से शिक्षा विभाग में स्कूल लेक्चरर के पद पर भी पुराने नियमों के तहत भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई।
अफसरों की लापरवाही को अमर उजाला ने सार्वजनिक किया तो सरकार की नींद टूटी और आनन फानन में बैठक बुला ली गई। सूत्रों की मानें तो नियमों में कानूनी पेच के चलते मंत्रिमंडल का फैसला अब तक लागू नहीं हो सका है। वहीं, वैकल्पिक व्यवस्था मेें भी कानूनी पेंच फंसने का डर है, ऐसे में अफसर कोई ऐसा कदम उठाने से बचना चाह रहे हैं।
वहीं, इंटरव्यू व्यवस्था खत्म करने के बाद शुरू की गई असेसमेंट प्रक्रिया पर भी चर्चा के बाद कोई निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों का कहना है कि दोनों ही मुद्दों पर अब अफसरशाही दोबारा बैठकर किसी ठोस निर्णय पर पहुंचेगी, उसके बाद ही प्रदेश के युवाओं को प्राथमिकता पर फैसला हो सकेगा।