अवैध खनन के मुद्दे पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी शहर के ब्यास नदी में मिलने वाली लोहारा, कंसा और सुकेती खड्डों का तीन सप्ताह के भीतर निरीक्षण करने के आदेश दिए। कोर्ट ने लोहारा खुड पर कन्सा चौक पर बने पुल का निरीक्षण करने के आदेश भी दिए। न्यायालय ने इन क्षेत्रों में अनधिकृत खनन को रोकने के लिए डीसी मंडी, एसपी मंडी और जिला खनन अधिकारी मंडी को सभी कठोर कार्रवाई के आदेश दिए। मामले पर सुनवाई 6 जनवरी 2020 के लिए निर्धारित की गई है।
न्यायालय ने उक्त निरीक्षण के दौरान खनन, उद्योग विभाग, सिंचाई और जन स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग और वन विभाग के अधिकारियों को उपस्थित रहने का भी आदेश दिया है। ग्राम पंचायत लोहारा, ढाबन और नगर परिषद नेर चौक के अध्यक्ष सहित संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों को भी निरीक्षण के समय उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश धर्म चंद चौधरी और न्यायाधीश अनूप चिटकारा की खंडपीठ ने यह आदेश जिला मंडी के सुभाष चंद के दायर एक याचिका पर दिए।
याचिका में आरोप लगाया है कि मोहाल तवन 231 तहसील बल्ह जिला मंडी में 5 से अधिक वर्षों से राजस्व, पुलिस, उद्योग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की मिली भगत से खनन माफिया द्वारा वर्षों से इस प्रकार सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप है कि शिकायत पर कोई निरीक्षण या छापामारी की जानी हो तो छापे की पूर्व सूचना इन माफिया को लीक कर दी जाती है।
ये मौके से भाग जाते हैं या अपने वाहन घटनास्थल पर छोड़ देते हैं। इनके महज चालान किए जाते हैं। जब भी कोई भी अवैध खनन के बारे में शिकायत उठाता है तो जवाब देने वालों का जवाब स्टीरियो टाइप होता है कि मौके पर कुछ भी नहीं मिला। कोर्ट सरकार को अवैध खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने और उनके खिलाफ मामले दर्ज करने के आदेश दिया जाएं।
न्यायालय ने निरीक्षण दल आदेश दिए हैं कि क्या खानों और खनिजों का कोई भी अनधिकृत उत्खनन किया गया है या नहीं और यदि ऐसा है तो इससे क्या जल स्तर और वन भूमि या सरकारी भूमि के जलाशयों को कोई नुकसान हुआ है। अवैध और अनधिकृत खनन से क्षेत्र में पर्यावरण प्रदूषण का आकलन करने और उत्पन्न खतरे का आकलन करने के आदेश भी दिए।